Friday, August 14th, 2020
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लॉकडाउन के कारण जियो, एयरटेल और वोडाफोन को लगा बड़ा झटका

नई दिल्ली
रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया को इस साल मार्च में बड़ा झटका लगा है। यह झटका नए ग्राहक (सब्सक्राइबर) जोड़ने के मामले का है। टेलिकॉम इंडस्ट्री और एनालिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने इस साल मार्च में कुल मिलाकर सिर्फ पांच लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं। आमतौर पर तीनों टेलिकॉम कंपनियां हर महीने औसतन 30 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़ती हैं। एनालिस्टों ने नए सब्सक्राइबर्स की संख्या में आई इस तेज गिरावट के पीछे कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन को वजह बताया।
अप्रैल में और घट सकती है नए ग्राहकों की संख्या
उन्होंने बताया कि मार्च में स्टोर्स पर ग्राहकों की संख्या कम रही और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के लिए भी काफी कम आवेदन आए। उन्होंने बताया कि अप्रैल में नए सब्सक्राइबर्स की संख्या इससे भी कम रह सकती है। इंडस्ट्री के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'आमतौर पर हर महीने में औसतन 25 से 30 लाख नए सब्सक्राइबर्स जुड़ने की उम्मीद की जाती है। इस आपातकालीन स्थिति में ऑपरेटर्स को मार्च और अप्रैल में 5 लाख कस्टमर्स जोड़ने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।'
 
MNP से जुड़ी सभी गतिविधियां हो गईं हैं बंद
एक दूसरी टेलिकॉम कंपनी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया कि तीन हफ्तों के लॉकडाउन के ऐलान के बाद से उन्होंने स्टोर्स बंद कर दिए हैं। साथ ही MNP से जुड़ी सभी गतिविधियां भी बंद हो गई हैं क्योंकि टेलिकॉम कंपनी, ग्राहक और MNP प्रोवाइडर्स के बीच तालमेल के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। एक प्रमुख टेलिकॉम कंपनी के सीनियर अधिकारी ने बताया, 'फिलहाल अगर इंडस्ट्री इस महीने 5 लाख और अगले महीने 5 लाख सब्सक्राइबर्स को जोड़ने में सफलता पाती है, तो हम खुद को भाग्यशाली समझेंगे।' उन्होंने बताया, 'लॉकडाउन से पहले छोटे शहरों में जो नए कस्टमर्स बन रहे थे, वे भी बंद हो गए हैं।'
 
दिसंबर के आखिर में जियो के पास थे 37 करोड़ ग्राहक
पिछले साल दिसंबर के अंत के तक रिलायंस जियो के पास कुल 37 करोड़, वोडाफोन आइडिया के पास कुल 30.4 करोड़ और भारती एयरटेल के पास कुल 28.3 करोड़ यूजर्स थे। इन तीनों टेलिकॉम कंपनियों ने ईटी के भेजे सवालों के जवाब नहीं दिए। सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट के पीछे एक और वजह MNP गतिविधियों का धीमा होना है। एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'मोबाइल नबंर पोर्टेबिलिटी का काम देखने वाली दोनों कंपनियों को हर महीने औसत तौर पर मिलने वाले अनुरोध में करीब 95 पर्सेंट की कमी आई है। चूंकि, ऑफिस में काम करने के लिए कोई स्टाफ मौजूद नहीं है, ऐसे में काम पूरी तरह बंद हो गया है।' साइनिवर्स टेक्नोलॉजीज इंडिया और MNP इंटरकनेक्शन टेलीकॉम सॉल्यूशंस इंडिया ऐसी दो कंपनियां हैं, जो देश में MNP का काम देखती हैं। इन्होंने ईटी के भेजे सवालों का जवाब नहीं दिया।

रिटेलर्स का कहना है कि उनके आंकड़े अब घटकर शून्य पर आ गए हैं और बिजनेस के तेजी पकड़ने में लंबा समय लग सकता है। दिल्ली में एक रिटेलर ने बताया, 'अगर यह जानना चाहते हैं कि कितनी गिरावट आई है, तो इसे 100 पर्सेंट मानिए। सभी स्टोर बंद हैं और सिम कार्ड की बिक्री बिल्कुल ठप है।'
 

Source : Agency

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