जॉनसन ऐंड जॉनसन गड़बड़ हिप ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को 20 लाख रुपये देने का आदेश

 नई दिल्ली 
जॉनसन ऐंड जॉनसन का फॉल्टी हिप ट्रांसप्लांट जिन लोगों को किया गया है, उन्हें फौरी तौर पर राहत का ऐलान किया गया है। इंडियन ड्रग रेग्युलेटर ने कंपनी से 20 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने के लिए कहा गया है। साथ सरकार द्वारा बनाई गई कमिटी की सिफारिशों को मानने के लिए कहा गया है।  
 
जॉनसन ऐंड जॉनसन को सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वह मरीजों को 20 लाख रुपये की तुरंत मदद करें। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉक्टर अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में बनी कमिटी की सिफारिशों के बाद यह फैसला किया गया है।

सीडीएससीओ का कहना है कि प्रत्येक मरीज को इम्प्लांट के बाद आई दिक्कतों को आकलन किया जाएगा, उसके बाद प्रत्येक के लिए अलग से मुआवजे का ऐलान किया जाएगा। 

कंपनी का कहना है कि उन्होंने भारत में करीब 4700 लोगों को यह ट्रांसप्लांट किया है, लेकिन अभी भी 3600 मरीजों को पता लगाया जाना बाकी है। त्वरित मुआवजे के अतिरिक्त रेग्युलेटर ने कंपनी से उनके मेडिकल मैनेजमेंट प्रोग्राम को बढ़ाने और मरीजों को 2025 तक उनके मेडिकल कॉस्ट का भुगतान करने के लिए कहा है। रेग्युलेटर का कहना है कि एक ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट की सामान्य उम्र 15 साल होती है। कंपनी ने पिछले साल मरीजों के लिए बनाए गए मैनेजमेंट प्रोग्राम को खत्म कर दिया था। 

जॉनसन ऐंड जॉनसन ने वैश्विक स्तर पर 2010 में किए गए ट्रांसप्लांट को पूरी तरह वापस लेने का फैसला लिया था। इससे प्रभावित मरीजों के लिए कंपनी ने अपना भुगतान नियम अगस्त 2017 में बदल दिया था। अमेरिका में 8000 मरीजों को 2.5 बिलियन डॉलर का भुगतान किया गया था। 

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