मांग कमजोर होने से खाद्य तेल- तिलहनों के भाव टूटे

नई दिल्ली
 
इंडोनेशिया में खाद्य तेल के निर्यात पर पाबंदी हटने की अटकलें तेज होने और मांग कमजोर होने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सरसों एवं मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में गिरावट आई। वहीं शुक्रवार रात को शिकागो एक्सचेंज की भारी गिरावट के बाद थोड़ा सुधार होने से सोयाबीन डीगम और पामोलीन के साथ साथ बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया। सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन इंदौर तेल और सीपीओ सहित अन्य तेल तिलहनों के भाव पूर्व-स्तर पर बने रहे।
 
बाजार सूत्रों ने बताया कि शिकॉगो एक्सचेंज में शुक्रवार को शुरुआत में लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट थी लेकिन देर रात में यह सुधार दर्शाता हुआ आधा प्रतिशत की गिरावट पर बंद हुआ। इस सुधार के रुख की वजह से सोयाबीन दिल्ली एवं डीगम तथा पामोलीन तेल कीमतों में सुधार आया। रुपये में गिरावट आने से आयात महंगा होने से भी खाद्यतेल की कीमतों में मजबूती आई। पर्याप्त मांग होने से बिनौला तेल कीमतों में भी सुधार हुआ। ऊंचे भाव पर कम कारोबार होने के बावजूद सोयाबीन इंदौर तेल, सीपीओ और सोयाबीन दाना एवं लूज के भाव पूर्व-स्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि पिछले साल तिलहन पर स्टॉक लिमिट का प्रतिबंध नहीं होने के कारण व्यापारियों ने सरसों का लगभग 30 लाख टन का स्टॉक रखा था जिससे अक्ट्रबर-नवंबर में सरसों की जरुरतें पूरा करने में मदद मिली थी। ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से सहकारी संस्थाओं को बाजार भाव पर सरसों का कुछ स्टॉक बना लेना चाहिये जो आगे जाकर काम आयेगा। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक, इस साल अधिक पैदावार होने के बावजूद सबसे सस्ता होने के कारण सरसों से बाकी खाद्य तेलों की कमी को पूरा किया जा रहा है और भारी मात्रा में सरसों के रिफाइंड बनाये जा रहे हैं। सूत्रों ने सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग की। कारोबारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार को खाद्यतेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आयात शुल्क में कमी से बचना चाहिये और उसे तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना चाहिये। 

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