Gold Price : सोने की कीमतों पर उपभोक्तों की मांग का पड़ता है असर

भारत Gold की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में से एक है. Gold Price पारंपरिक रूप से देश में सोने की ज्यादातर खपत आभूषणों की है.

Gold Price : यही कारण है कि त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के मौसम में देश में सोने के दाम बढ़ जाते हैं. हालांकि, सिर्फ इसी बात से इस पीली धातु की कीमतें तय नहीं होती हैं. तमाम ऐसी बातें है जो इसके दाम को चढ़ाती और गिराती हैं. आइए, इनके बारे में जानते हैं.

उपभोक्तों की मांग | consumer demand

भारत में सोने की मांग काफी कुछ संस्कृति, परंपरा, सौंदर्य और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल व उद्योग चैंबर फिक्की के अध्ययन के मुताबिक, भारतीय सोने को निवेश और साज-सज्जा की वस्तु दोनों के रूप में देखते हैं. customers demand जब उनसे पूछा गया कि वे सोना क्यों खरीदते हैं, तो लगभग 77 फीसदी ने कहा कि यह सुरक्षित निवेश का विकल्प है. इसके उलट केवल 50 फीसदी से कुछ ज्यादा लोगों ने माना कि वे इसे साज-सज्जा की वस्तु के रूप में देखते हैं.income of consumer in demand

इसे भी पढ़ें : Gold Silver Price Today: सोना चांदी खरीदने से पहले चेक करें लेटेस्ट रेट

अस्थिरता से बचाता है

निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं. अस्थिरता और अनिश्चितता से खुद को बचाने के लिए लोग इस पीली धातु को खरीदते हैं. जब दूसरी संपत्तियां अपना मूल्य खोने लगती हैं, सोना इस गिरावट से बचा रहता है. भारतीयों में सोने का आकर्षण हमेशा से रहा है. समय अच्छा हो या बुरा लोग इस चमकीली धातु का मोह नहीं छोड़ पाते. अर्थव्यवस्था दौड़ी या मंद हुर्इ, निवेशकों ने सोने में खरीद जारी रखी.

क्या है सोने और महंगाइ का रिश्ता?

जब महंगार्इ बढ़ती है तो करेंसी की कीमत कम हो जाती है. उस समय लोग धन को सोने के रूप में रखते हैं. इस तरह महंगार्इ के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने पर सोने का इस्तेमाल इसके असर को कम करने के लिए किया जाता है.

क्या है सोने और ब्याज दर का संबंध? high consumer demand

उद्योग के कुछ जानकारों के मुताबिक, सामान्य स्थितियों में सोने और ब्याज दरों के बीच उलटा संबंध है. ब्याज दरों का बढ़ना संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है. मजबूत अर्थव्यवस्था में महंगार्इ बढ़ती है. महंगार्इ के खिलाफ सोने को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा जब दरें बढ़ती हैं तो निवेशक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसे लगाते हैं. सोने के उलट इनमें उन्हें ज्यादा अच्छा रिटर्न मिलता है.

अच्छा मानसून कैसे डालता है खपत पर असरॽ

सोने की खपत में ग्रामीण मांग की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह खपत मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है. भारत सालाना 800-850 टन सोने की खपत करता है. इस खपत में 60 फीसदी हिस्सेदारी ग्रामीण भारत की है. अगर फसल अच्छी होती है, तो किसान अपनी आय से संपत्तियां बनाने के लिए सोना खरीदते हैं. इसके उलट, अगर मानसून खराब रहता है तो किसान धन जुटाने के लिए सोने को बेचते हैं.

इसे भी पढ़ें : Gold Rate: सोने का भाव कैसे किया जाता है निर्धारित?

रुपये-डॉलर के गणित का कितना पड़ता है प्रभावॽ

भारतीय सोने के मूल्य डॉलर के मुकाबले रुपये कीमत से प्रभावित होते हैं. हालांकि, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर इसका कोर्इ असर नहीं पड़ता है. आमतौर पर सोने को आयात किया जाता है. इसलिए अमेरिकी मुद्रा की तुलना में रुपये के कमजोर होने से सोने की कीमतें भारतीय मुद्रा में बढ़ जाती हैं. इस तरह रुपये की कीमत घटने से सोने की मांग को चपत लगती है.

दूसरे एसेट क्लास के साथ रिश्ता

कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि सोने का ज्यादातर एसेट क्लास के साथ उलटा संबंध है या फिर इनके साथ इसका कोर्इ संबंध नहीं होता है. इसलिए पोर्टफोलियो को ये विविधता प्रदान करता है. जब शेयरों में तेज गिरावट आती है तो अमूमन सोने के दाम बढ़ते हैं. माना जाता है कि इस दौरान निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं.

भू-राजनीतिक तनाव

दुनिया में जब तनाव की स्थिति बढ़ती है तो सोने में निवेश मांग बढ़ जाती है. यह कर्इ बार देखा गया है.

डॉलर की कमजोरी का क्या पड़ता है असर?

सामान्य स्थिति में जब डॉलर कमजोर होता है तो सोना चढ़ता है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में होती हैं, इसलिए डॉलर में कमजोरी आने पर पीली धातु के दाम मजबूत होते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य हैं. Ujjwal Pradesh इस लेख की पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Show More

Related Articles

Back to top button
Join Our Whatsapp Group