सरकारी कर्मचारियों को अगले महीने मिलेगी तीन खुशखबरी

मुंबई

 अगले महीने केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को तीन तोहफे दे सकती है। सरकार कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि के साथ बकाया राशि के भुगतान पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी के साथ बकाया डीए का भुगतान और पीएफ ब्याज की राशि भी सरकार कर्मचारियों को दे सकती है। बता दें कर्मचारियों को 18 महीने का डीए नहीं मिला है। सरकार ने कोरोना महामारी के कारण इसे होल्ड पर रखा था।

बकाया महंगाई भत्ता का भुगतान

रिपोर्ट्स की माने तो केंद्र कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ता का भुगतान जुलाई में कर सकती है। जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 माह का डीए बकाया है। कहा जा रहा है कि कर्मचारियों को दो लाख रुपए का बकाया डीए एरियर मिल सकता है।

कोरोना महामारी के कारण रोक दिया गया था महंगाई भत्ता

कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जनवरी, 2020, 1 जुलाई, 2020 और 1 जनवरी, 2021 के लिए DA और DR की तीन किस्तें रोक रखी थीं. वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण ने पिछले साल अगस्त में राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा था कि डीए और डीआर रोके जाने से लगभग 34,402 करोड़ रुपए की बचत हुई.

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए डीए और डीआर को क्रमशः 17 फीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी कर दिया था. फिर से अक्टूबर 2021 में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

महंगाई भत्ता में वृद्धि

वहीं केंद्र सरकार जुलाई में केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में वृद्धि कर सकती है। सरकार कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में 4 से 5 फीसदी तक इजाफा कर सकती है। फिलहाल 34 फीसदी की दर से कर्मचारियों को डीए मिल रहा है। केंद्र ने मार्च में तीन फीसदी डीए बढ़ाया था। बता दें मई में रिटेल महंगाई दर 7.04 फीसदी रही। यह आरबीआई द्वारा तय टारगेट से अधिक है। यदि सरकार डीए में बढ़ोतरी करती है, तो 50 लाख से अधिक कर्मचारियों को 65 लाख पेंशनर्स को इसका लाभ मिलेगा।

पीएफ ब्याज मिलेगा

केंद्र सरकार ईपीएफओ के ब्याज दर मुहर लगा चुकी है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ईफीएफ पर 8.01 प्रतिशत ब्याज दर तय है। पिछले वित्त वर्ष में ब्याज दर 8.5 फीसदी थी। ब्याज दर कम होने से लाखों नौकरीपेशा को झटका लगा है। कहा जा रहा है कि सरकार अगले महीने कर्मचारियों के बैंक खाते में पीएफ के ब्याज की रकम ट्रांसफर कर सकती है।

क्‍या होती हैं अर्जित छुट्टियां (Earned Leave)

सभी सरकारी और निजी दफ्तरों में कुछ ऐसी छुट्टियां होती हैं, जो आप हर साल कैरी फॉरवर्ड होती रहती हैं. कुछ कंपनियों में इसे प्रिविलेज लीव भी कहा जाता है. हालांकि निजी कंपनियों में इसके कैरी फॉरवर्ड होने की बाध्‍यता नहीं है. कई निजी कंपनियों में छुट्टियां कैरी फॉरवर्ड नहीं होतीं.

भारत सरकार के मौजूदा श्रम नियमों के मुताबिक एक सरकारी कर्मचारी को साल में 30 तीनों की अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) मिलती हैं. अगर वो ये छुट्टी नहीं लेते तो वह अगले साल कैरी फॉरवर्ड हो जाती हैं और अगले साल की छुट्टी 60 दिनों की हो जाती है.

अभी तक इस तरह की कुल अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) 300 से ज्‍यादा नहीं हो सकतीं. 300 से ज्‍यादा होने पर छुट्टियां लैप्‍स हो जाती हैं.

मोदी सरकार तो नया नियम लेकर आ रही है, उसके मुताबिक अब इन छुट्टियों की संख्‍या 300 से बढ़ाकर 450 कर दी गई है. यानि अब कुल अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) 450 तक हो सकती हैं, जिन्‍हें सरकारी कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी ले सकते हैं.

रिटायरमेंट के समय यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खाते में बहुत सारी अर्जित छुट्टियां हैं तो उन्‍हें उसके बदले में बेसिक सैलरी भी मिलती है. कुछ केसेज में उन छुट्टियों के बदलते अर्ली रिटायरमेंट भी लिया जा सकता है.

श्रम संगठन और यूनियन काफी समय से इन छुट्टियों को बढ़ाकर 450 करने की मांग कर रहे हैं. भारत सरकार के लेबर कोड के नियमों को बदलने की यह मांग और उसकी प्रक्रिया पिछले काफी समय से चल रही है.

सरकार के श्रम मंत्रालय, लेबर यूनियनों और बिग इंडस्‍ट्रीज के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय तक बातचीत का नतीजा है यह नया लेबर कोड, जो मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आगामी 1 जुलाई से लागू हो सकता है. तीनों संबंधित पार्टियों के बीच हुई मीटिंगों में इस पर विस्‍तार से चर्चा की गई कि काम के घंटे, सैलरी, प्रॉविडेंट फंड, छुट्टियों और रिटायरमेंट का मौजूदा स्‍ट्रक्‍चर कर्मचारियों और कंपनियों के कितने हित में है और उसमें किस तरह के बदलाव की जरूरत है.

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