महंगाई की मार: खाद्य तेलों ने सबसे ज्यादा ढीली की जेब, अभी पेट्रोल-डीजल देंगे बड़ा झटका

नई दिल्ली

हालांकि, शहरी क्षेत्र में खाद्य तेलों की महंगाई दर संयुक्त स्तर से कम 13.20 फीसद रही है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 18.09 फीसद रही है। इसके अलावा फुटवियर की महंगाई दर दो अंकों में 10.10 फीसद रही है। शहरी क्षेत्र में यह 8.75 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र में 11.04 फीसद रही है। अन्य सभी प्रमुख वस्तुओं की खुदरा महंगाई दर एक अंक में ही रही है।

बता दें फरवरी 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) यानी खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़ोतरी के साथ 6.07 फीसद रही है। एक साल पहले समान अवधि में खुदरा महंगाई 5.03 फीसद थी। इस साल जनवरी में यह 6.01 फीसद थी। हालांकि, यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उपरी सीमा के लक्ष्य से ज्यादा बनी हुई है।
 

थोक महंगाई 13.11 फीसद पर पहुंची

दूसरी ओर, थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति बढ़कर 13.11 फीसद पर पहुंच गई। थोक मुद्रास्फीति अप्रैल, 2021 से लगातार 11वें माह 10 फीसद से ऊंची बनी हुई है। जनवरी, 2022 में डब्ल्यूपीआई 12.96 फीसद थी, जबकि पिछले वर्ष फरवरी में यह 4.83 फीसद पर थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का कहना है कि फरवरी, 2022 में मुद्रास्फीति बढ़ने की प्रमुख वजह खनिज तेलों, मूल धातुओं, रसायनों और रासायनिक उत्पादों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और गैर-खाद्य वस्तुओं आदि की कीमतों में वृद्धि है।

पेट्रोल-डीजल देंगे बड़ा झटका

कच्चे तेल के दाम वैश्विक स्तर पर बढ़ने के कारण फरवरी में कच्चे पेट्रोलियम की थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 55.17 फीसद हो गई, जो जनवरी में 39.41 फीसदी थी। एक साल पहले समान अवधि में कच्चे पेट्रोलियम की मुद्रास्फीति 19.54 फीसदी थी। कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई से आने वाले दिनों में खुदरा स्तर पर बड़ा झटका दे सकती है। इसका कारण यह है कि घरेलू बाजार में करीब चार महीने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सालाना आधार पर एलपीजी की थोक मुद्रास्फीति 1.42 फीसद से बढ़कर 26.27 फीसद, पेट्रोल की 4.96 फीसद से बढ़कर 58.33 फीसद और डीजल की 3.16 से बढ़कर 53.59 फीसद पर पहुंच गई है।
 
देश में खुदरा महंगाई दर 299 सामानों की कीमतों के आधार पर तय होती है। इसमें कई सामान ऐसे हैं जो दशकों पुराने हैं और इनको सीपीआई की गणना में शामिल करने का अब कोई औचित्य नहीं है। गणना में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, सीपीआई बास्केट में कम से कम 10 से 12 फीसद सामान निष्क्रिय हैं। इसमें सीडी, ऑडियो कैसेट या नोकिया के फोन जैसी वस्तुएं भी शामिल हैं। ऐसे में महंगाई की गणना में इनके इस्तेमाल का कोई औचित्य नहीं हो सकता है। अन्य निष्क्रिय सामानों में केबल टीवी कनेक्शन, वीसीडी या डीवीडी का किराया, सीडी, डीवीडी, ऑडियो-वीडियो कैसेट, टू-इन-वन रेडियो, टेप रिकॉर्डर शामिल हैं।

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