टीवी से बॉलिवुड में एंट्री मार रही हैं ये ऐक्ट्रेसेस

टीवी की नामी ऐक्ट्रेस कृतिका कामरा फिल्म 'मित्रों' से बॉलिवुड में डेब्यू कर रही हैं। कृतिका कहती हैं, 'कई बार ऐसा हुआ कि कोई फिल्म होते-होते रह गई या बड़े प्रॉडक्शन हाउस से कॉन्ट्रैक्ट साइन हुए पर काम शुरू नहीं हुआ। कहते हैं न तब अच्छा होता है जब आप उम्मीद करना बंद कर देते हैं। मैं सीरियल पर फोकस करने लगी। मैंने 'चंद्रकांता' के बाद ब्रेक लेने का सोचा पर नैशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर नितिन कक्कड़ का कॉल आया। मैं वैसे भी उनसे मिलना चाहती थी क्योंकि मुझे उनकी पहली फिल्म बहुत पसंद आई थी। जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो कहानी से प्यार हो गया। दूसरे दिन ही उनका कॉल आया और उन्होंने कहा कि मुबारक हो आप फिल्म में काम कर रही हैं।'

टाइटल से पीएम का कनेक्शन नहीं
हमारे फिल्म के टाइटिल 'मित्रों' को लेकर कंफ्यूजन था। लेकिन मैं आप सबको बता दूं कि फिल्म पूरी तरह से दोस्ती पर आधारित है। इसलिए इसके टाइटिल का हमारे पीएम से कोई कनेक्शन नहीं है। फिल्म का पूरा फोकस दोस्ती पर ही रखा गया है। यहां हम केवल यंगस्टर्स के बीच की दोस्ती की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि हम तो रिलेशनशिप के बीच की दोस्ती को भी दर्शा रहे हैं। कहानी और किरदार आपको बहुत ही कनेक्ट करेंगे। हमने हर चीजों को रियल रखा है। सेट के बजाय घरों पर जाकर शूटिंग की है।

जिस रोल से कनेक्ट होऊंगी, वही करुंगी
एक लंबे समय से टेलिविजन के कॉन्टेंट को लेकर बहस चल रही है। सुपरनैचुरल शोज को अलग पब्लिक नकार देती तो ऐसे शोज नहीं बनते लेकिन यहां लोग इस तरह के शोज का लुत्फ उठा रहे हैं। यही वजह है टीआरपी भी उन्हें अच्छी मिल रही है। इसलिए टेलिविजन केवल इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। दूसरी बात अगर हम कुछ अलग और हटकर बनाए भी तो दर्शकों का वह रिस्पॉन्स नहीं मिल पाता है। इससे न केवल एक ऐक्टर निराश होता है बल्कि प्रॉड्यूसर भी हताश हो जाते हैं। कुछ समय पहले हमने एक 'रिपोर्टर्स' नाम का शो बनाया था। इस शो को उतनी टीआरपी नहीं मिली। ऐसे में कोई क्यों इतना रिस्क लेगा आखिरकार यहां तो सब बिजनेस ही कर रहे हैं न। मैं सुपरनैचुरल शोज से खुद को कनेक्ट नहीं कर पाती हूं। यही वजह है कि इस तरह के शोज में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है।

मैं रिजेक्शन आज तक फेस कर रही हूं
टेलिविजन की ऐक्ट्रेसेज के लिए फिल्मों में करियर बना पाना बहुत मुश्किल है। ऑडिशन में रिजेक्शन मैं आजतक फेस कर रही हूं। ऑडियंस कभी टीवी और फिल्म ऐक्टर्स के बीच भेदभाव नहीं करती है लेकिन इंडस्ट्री हमें अलग निगाहों से देखती है। सुशांत सिंह राजपूत एक एक्सेप्शन हैं, जिन्होंने अपना एक मुकाम हासिल किया है। मैं बहुत खुश हूं कि इस साल बहुत सी टीवी ऐक्ट्रेस अपना फिल्म डेब्यू कर रही हैं। लेकिन उनकी यह राह आसान तो बिलकुल नहीं रही होगी। मेरे साथ भी कितनी बार ऐसा हुआ कि शेड्यूल आ गया और ड्रेस ट्राइ भी कर लिए लेकिन फिल्म नहीं बन पाई। मुझे हर ऑडिशन में यह साबित करना पड़ता है कि हम टेलिविजन ऐक्टर्स लाउड ऐक्टिंग नहीं करते हैं।

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