परमाणु हथियारों को लेकर कैसे पाकिस्तान का मॉडल अपना रहा नॉर्थ कोरिया?

वॉशिंगटन 
करीब सात वर्षों तक नॉर्थ कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाए रखी। कभी अंडरग्राउंड ब्लास्ट किए जाते तो कभी आसमान में मिसाइलें दागी जातीं। संदेश साफ था कि नॉर्थ कोरिया अपनी ताकत के साथ परमाणु शस्त्रागार भी बढ़ा रहा है। दुनिया में अक्सर नॉर्थ कोरिया के कदमों से खलबली सी मच जाती थी। हालांकि मौजूदा और पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारियों की मानें तो नॉर्थ कोरिया ने अब अपना अप्रोच बदल दिया है और यह सब हुआ है कि तीन महीने पहले सिंगापुर में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद। न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।  
 
दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक पटल पर जो जानकारियां मौजूद हैं, उसके मुताबिक नॉर्थ कोरिया अब भी पहले की तरह न्यूक्लियर फ्यूल बना रहा है और अपने हथियारों को बढ़ा रहा है। अब ऐसा लगता है जैसे उसने इजरायल, पाकिस्तान और भारत से बहुत कुछ सीखा है। जी हां, अब वह कार्यक्रम को लेकर शांत रहने लगा है। हाल में सार्वजनिक तौर पर परमाणु हथियारों की नुमाइश नहीं की गई और न ही कोई संकट खड़ा करने की कोशिश हुई। ऐसे में ट्रंप को मानना पड़ा है कि निरस्त्रीकरण का प्रयास पटरी पर है। 

ट्रंप भी नरम पड़े 
किम की इस नई रणनीति का ही परिणाम है कि हाल में ट्रंप ने उनके लिए अच्छे शब्दों का इस्तेमाल किया। एक हफ्ते पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने किम की तारीफ करते हुए कहा कि उनके (किम) साथ विशेष लगाव हो गया है। इससे पहले मिलिटरी परेड के दौरान प्योंगयांग की सड़कों पर नॉर्थ कोरिया ने अपनी मिसाइलों की नुमाइश नहीं की थी, जबकि पहले वह बड़े पैमाने पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करता रहा है। 

मून तीसरी बार मिलेंगे 
मंगलवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन प्योंगयांग में नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन से मिलेंगे। यह दोनों नेताओं के बीच तीसरी मीटिंग होगी। तीन दिनों में दोनों के बीच शांति घोषणा पर चर्चा किए जाने की संभावना है। कोरियाई क्षेत्र के लिए किम का बदला अंदाज काफी मायने रखता है क्योंकि उनके उकसावेपूर्ण कदमों के चलते ट्रंप ने कई बार धमकी दे डाली थी। ट्रंप ने एक साल पहले ही कहा था कि किम हथियारों को नष्ट करें या फिर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें। 

ट्रंप को नाराज नहीं करेंगे किम? 
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि नए आकलन से पता चलता है कि किम अब ट्रंप के हिसाब से चलना चाहते हैं। नॉर्थ कोरियाई लीडर यह मानकर चल रहे हैं कि अगर दोनों नेताओं के बीच संबंध बेहतर रहते हैं तो वह निरस्त्रीकरण की मांगों को रोक सकते हैं। अगर किम परीक्षण नहीं करते हैं तो इस बात की संभावना कम ही है कि ट्रंप उनसे सबूत दिखाने को कहेंगे। 

वाइट हाउस का तर्क 
उधर, वाइट हाउस का कहना है कि संबंधों में काफी प्रगति हुई है। ट्रंप के प्रेस सेक्रटरी सारा सैंडर्स ने कहा कि मौजूदा हालात से लग रहा है कि किम डील को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि किम ने 10 महीने पहले अपना अंतिम मिसाइल और परमाणु परीक्षण किया था। हालांकि सैटलाइट तस्वीरों और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर कहा जा रहा है कि परमाणु प्रॉडक्शन लगातार जारी है। इस बीच, किम ने अपने एक परमाणु परीक्षण स्थल के गेट को विस्फोट से उड़ा दिया था, जिससे दुनिया में संदेश गया था कि उन्होंने अपने हथियारों को नष्ट करना शुरू कर दिया है। 

क्या है किम का पाक मॉडल? 
किम की रणनीति को समझना बिल्कुल आसान है- पाकिस्तान की नकल उतारो, जिसने 1998 में एक बड़ा परमाणु परीक्षण किया था और वह इस पर चर्चा करने से बचता रहा। उसके पास पर्याप्त शस्त्रागार है लेकिन हाल में जब अमेरिकी विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंचे तो पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार पर चर्चा काफी कम हुई। 

बुश प्रशासन में काम कर चुके निकोलस बर्न्स कहते हैं कि किम यह समझ चुके हैं कि किस चीज से पाकिस्तान की रक्षा हुई। जब तक आपके पास कई देशों का साथ है, जो आपको मान्यता देते हैं और आपके साथ कारोबार करते हैं तो अमेरिका के लिए परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए दबाव डालना काफी मुश्किल होगा। पाकिस्तान पर उसके परमाणु कार्यक्रम के कारण काफी कम प्रतिबंध हैं। उसने पिछले 20 वर्षों में कोई परीक्षण भी नहीं किया है। 

किम का अगला कदम 
ऐसे हालात में किम ने चीन और रूस से कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को अमेरिका की यूएन राजदूत निकी हैली ने आरोप लगाया कि रूस नॉर्थ कोरिया पर प्रतिबंधों वाले यूएन ड्राफ्ट में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है। 
 

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