श्रीलंका में दवाओं की भारी कमी, स्वास्थ्य आपातकाल घोषित, फिर निशाने पर आई सरकार

कोलंबो

पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच दवा की भारी कमी होने लगी है। मंगलवार को देश में आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति का ऐलान कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला मरीजों की जान की सुरक्षा के लिहाज से लिया गया है। इससे पहले भी सरकार ने फरवरी में जन स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरी सेवा घोषित किया था। श्रीलंका में नागरिकों को दवाओं के अलावा बिजली जैसी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। समाचार एजेंसी ने द डेली मिरर के हवाले से लिखा कि देश के गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (GMOA) की आपातकालीन समिति बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई है। मीटिंग के दौरान आपातकाल कानून लागू करने और दवा की गंभीर कमी को लेकर चर्चाएं की गई। सचिव डॉक्टर शेनल फर्नांडो ने कहा कि मरीजों की जान बचाने के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति की घोषणा करने का फैसला लिया गया है।

एजेंसी के अनुसार, बैठक के दौरान GMOA ने खुलासा किया कि सरकार के खराब प्रबंधन के चलते देश में दवाओं की गंभीर कमी होगी। एएनआई ने श्रीलंकाई अखबार के हवाले से बताया कि अगर मौजूदा आर्थिक संकट जारी रहा, तो दवाओं की कमी बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच जाएगी। हाल ही में सरकार ने बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कर्फ्यू की घोषणा भी की थी। जनता सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर आई है।
 

डॉक्टर फर्नांडो ने कहा, 'स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरी घोषित करने के बाद सरकार को देश में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए थी।' उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को आपतकालीन दवाओं की कमी की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। आर्थिक संकट से निपटने के सरकार के प्रयासों के खिलाफ जनता नाराजगी जाहिर कर रही है। कोलंबो में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद श्रीलंका ने तीन दिवसीय कर्फ्यू का ऐलान कर दिया था।

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