यूक्रेन: कीव में बिगड़े हालात, भारत ने अपना दूतावास पौलेंड शिफ्ट किया

नई दिल्ली
रूसी सेना यूक्रेन के अलग-अलग शहरों को लगातार निशाना बना रही है। इसके बावजूद भी अभी तक ना ही यूक्रेन और ना ही रूस पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसी युद्ध के बीच भारत ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास को अस्थायी रूप से यूक्रेन के पड़ोसी देश पोलैंड शिफ्ट कर दिया गया। बताया गया है कि यह फैसला देश में 'बिगड़ती सुरक्षा स्थिति' और पश्चिमी हिस्सों में हमलों को देखते हुए लिया गया है। दरअसल, रविवार को विदेश मंत्रालय की तरफ से यह जानकारी देते हुए बताया गया कि यूक्रेन के पश्चिमी भाग में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि यूक्रेन में स्थिति भारतीय दूतावास को पोलैंड में अस्थायी रूस से स्थानानंतरिक किया जाएगा। यह निर्णय तब लिया गया जब रविवार को यूक्रेन संकट को लेकर पीएम मोदी एक एक उच्च स्तरीय बैठक की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाई लेवल मीटिंग में यूक्रेन में जारी संघर्ष को देखते हुए भारत की सुरक्षा तैयारियों और मौजूदा वैश्विक परिदृश्य की समीक्षा की गई। रविवार की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हिस्सा लिया। जब से रूस ने यूक्रेन पर अपना सैन्य हमला शुरू किया है, तब से प्रधानमंत्री केंद्रीय मंत्रियों और सीनियर अधिकारियों के साथ कई उच्च-स्तरीय बैठकें कर चुके हैं। इसी कड़ी में युद्ध के दौरान ही भारत ने युद्ध प्रभावित यूक्रेन में फंसे नागरिकों को वापस लाने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' नाम से विशाल अभियान शुरू किया। इसके अलावा पीएम मोदी ने दो युद्धरत राष्ट्रों के नेताओं- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके यूक्रेनी समकक्ष जेलेंस्की के साथ भी बातचीत की है। मोदी ने दोनों नेताओ से रक्तपात और विनाश को समाप्त करने के लिए वार्ता और कूटनीति की वापसी की अपील की है। उधर भारत अब तक रूस के आक्रमण के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को लेकर सतर्क रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र में मॉस्को के खिलाफ पारित प्रस्ताव से दूर रहा। इस बीच, भारत सरकार और पीएम मोदी को प्रशंसा मिली है। साथ ही पड़ोसी देशों के नेताओं ने यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को भी सुरक्षित वापस लाने के लिए धन्यवाद दिया है।

 

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