क्यों भड़क गए शांत देश स्वीडन में दंगे

स्टॉकहोम
यूरोपीय देश स्वीडन को दुनिया के कुछ सबसे शांत देशों में के एक माना जाता है। लेकिन पिछले दिनों यहां जबरदस्त दंगे भड़के हुए हैं। पिछले करीब पांच दिनों से स्वीडन के कई शहरों में हिंसक झड़पें हो रही हैं। स्वीडन में ये दंगे एक धुर दक्षिणपंथी, एंटी-इमिग्रेशन ग्रुप द्वारा कुरान को जलाने से भड़की हैं।

स्वीडन में क्यों फैली है हिंसा?
एक दक्षिणपंथी डेनिश पॉलिटिशियन द्वारा कुरान को जलाने और उस पर "सूअर का मांस" डालने की धमकी ने पिछले कुछ दिनों में स्वीडन में दंगों को जन्म दिया। मुस्लिम विरोधी और घोर-दक्षिणपंथी राजनीतिक दल, स्ट्राम कुर्स ने लैंडस्क्रोना शहर में 'कुरान जलाने' की योजना बनाई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थर फेंकने और कारों, टायरों और कचरे के डिब्बों में आग लगाने के बाद उसने इसे माल्मो शहर में करने की घोषणा की।  

दक्षिणी स्वीडन में पुलिस के प्रवक्ता किम हिल्ड ने कहा कि अधिकारी मुस्लिम विरोधी प्रदर्शनों की अनुमति रद्द नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा का उल्लंघन नहीं किया है। माल्मो शहर में इस कथित कार्यक्रम के होने की योजना को देखते हए वहां दंगे भड़ गए। स्ट्रैम कुर्स, या हार्ड लाइन आंदोलन का नेतृत्व करने वाले डैनिश-स्वीडिश चरमपंथी रासमस पलुदान ने कहा कि उन्होंने इस्लाम की सबसे पवित्र पुस्तक को पहले भी जलाया है और आगे भी ऐसा दोहराएंगे। स्थानीय मीडिया ने कहा कि रविवार को पूर्वी शहर नॉरकोपिंग में पुलिस द्वारा दंगाइयों को चेतावनी देने वाली हवाई फायरिंग में तीन लोग घायल हो गए। दंगों में कई वाहनों में आग लगा दी गई और कम से कम 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया।  शनिवार को दक्षिणी शहर माल्मो में एक धुर दक्षिणपंथी रैली के दौरान एक बस सहित वाहनों में आग लगा दी गई। इससे पहले, ईरान और इराक की सरकारों ने कुरान जलाने के विरोध में स्वीडिश दूतों को तलब किया था।

पहले भी इसी तरह की हरकतें कर चुका है पलुदान
स्वीडन के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख एंडर्स थॉर्नबर्ग ने शनिवार को एक बयान में कहा कि "हमने पहले भी हिंसक दंगे देखे हैं। लेकिन यह कुछ और है।" स्ट्रैम कुर्स द्वारा कुरान को जलाने की योजना का विरोध स्वीडन में पहले भी हिंसक हो चुका है। 2020 में, प्रदर्शनकारियों ने कारों में आग लगा दी थी और माल्मो में झड़पों में दुकान के मोर्चे क्षतिग्रस्त हो गए थे। पलुदान – जिसे डेनमार्क में नस्लवाद सहित अपराधों के लिए 2020 में एक महीने के लिए जेल में डाल दिया गया था – ने फ्रांस और बेल्जियम सहित अन्य यूरोपीय देशों में भी कुरान को जलाने की योजना बनाने का प्रयास किया है।

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