आर्टिफिशियल स्वीटनर का बच्चों पर पड़ रहा बुरा असर

आर्टिफिशियल स्वीटनर वैसे तो चीनी से कई गुना मीठी होती है, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ता है। खासकर बच्चों में इसका असर ज्यादा दिखाई देता है। दरअसल, हाल ही में यूएससी डोर्नसाइफ की एक स्टडी में सामने आया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने से बच्चों की याददाश्त कमजोर होने का खतरा रहता है। साथ ही उनमें दूसरे मानसिक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। किशोरावस्था में ज्यादा स्वीटनर लेने से इसका असर युवावस्था तक दिखाई देने लगता है। शोधकतार्ओं ने पाया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

चूहों पर हुई रिसर्च
प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर लिंडसे शियर ने इसके लिए कुछ चूहों पर प्रयोग किया। उन्हें आर्टिफिशियल स्वीटनर पानी में मिलाकर दिया गया। कुछ चूहों को सामान्य पानी दिया गया। इसके बाद चूहों के वयस्क होने पर उनके ऊपर कुछ टेस्ट किए गए। इसमें सामने आया कि स्वीटनर का नियमित सेवन करने वाले चूहे अपना रास्ता भटक जाते हैं। उनकी याददाश्त कमजोर थी और कोई भी चीज वे जल्दी भूल जाते थे। रिसर्चर्स ने पाया कि स्वीटनर का सेवन करने वाले चूहों में ग्लूकोज खून में अलग तरह से बहकर आंत तक पहुंच रहा था। स्टडी के सह-लेखक प्रो. स्कॉट कानोस्की कहते हैं कि बच्चों को कम उम्र से आर्टिफिशियल स्वीटनर का नियमित सेवन नहीं करना चाहिए। जहां तक हो सके, इससे बचना जरूरी है।

जीभ का तंत्रिका तंत्र गड़बड़ा जाता है, स्वाद भी नहीं आता
आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने वाले लोगों के जीभ पर मीठा अनुभव करने वाले रिसेप्टर्स (तंत्रिका तंत्र) में गड़बड़ी पैदा कर देता है। इससे लोगों के मुंह में स्वाद आना बंद हो जाता है। इसके चलते मीठा स्वाद अनुभव करने के लिए चाय, कॉफी या अन्य चीज में ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करना भी पड़ता है।
 

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