महामारी का रूप भी ले सकता है ‘खोस्ता-2’ वायरस

रूस में कोरोना की तरह ही चमगादड़ों में एक नए वायरस की पुष्टि हुई है। इसका नाम खोस्ता-2 है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह इंसानों को संक्रमित करने में सक्षम है और फिलहाल उपलब्ध कोई भी कोरोना वैक्सीन इसके खिलाफ कारगर नहीं है।

रूस में कोरोना की तरह ही चमगादड़ों में एक नए वायरस की पुष्टि हुई है। इसका नाम खोस्ता-2 है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह इंसानों को संक्रमित करने में सक्षम है और फिलहाल उपलब्ध कोई भी कोरोना वैक्सीन इसके खिलाफ कारगर नहीं है। हालांकि, अब तक किसी भी व्यक्ति में इसके संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। प्लोस पैथोजन्स जर्नल में प्रकाशित हुई रिसर्च के अनुसार अगर आपने कोविड वैक्सीन का डोज लिया है और आपके शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज हैं, तो भी आप खोस्ता-2 के इन्फेक्शन से नहीं बच सकते। इस वायरस को पहली बार साल 2020 में डिटेक्ट किया गया था। हालांकि, उस वक्त रिसर्चर्स को लगा था कि यह इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। लेकिन, अब नई रिसर्च में पता चला है कि वायरस दुनिया के लिए नया खतरा बन सकता है।

क्या है खोस्ता-2
कोविड-19 बीमारी फैलाने वाली रअफर-उङ्मश्-2 स्ट्रेन कोरोना वायरस का एक प्रकार है, इसी तरह से खोस्ता-2 भी कोरोना वायरस का ही एक प्रकार है। ळकटए मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक खोस्ता-2 जैसा ही एक खोस्ता-1 वायरस भी है, लेकिन यह इंसानों को संक्रमित नहीं करता।
रिसर्चर्स का कहना है कि रअफर-उङ्मश्-2 की प्रक्रिया जैसे ही खोस्ता-2 भी इंसान के सेल्स (कोशिकाओं) में घुस जाता है। हालांकि, कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की तरह यह भी लोगों को गंभीर रूप से बीमार नहीं कर सकता है। मगर यह रअफर-उङ्मश्-2 के जीन्स के साथ जरूर मिल सकता है।

कैसे फैलता है नया वायरस
खोस्ता-2 वायरस फिलहाल चमगादड़, पैंगोलिन, रैकून कुत्ते और सिवेट जैसे जंगली जानवरों और पक्षियों में फैल रहा है। स्टडी में शामिल माइकल लेटको कहते हैं कि नया वायरस भविष्य में महामारी का रूप ले सकता है। इसके अलावा यदि यह कोरोना के साथ मिल जाता है तो इसका संक्रमण खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों वायरस के मिलने की संभावना काफी कम है।

यूनिवर्सल वैक्सीन पर चल रही रिसर्च
लेटको कहते हैं कि दुनियाभर के वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन तैयार करने में लगे हुए हैं जो केवल रअफर-उङ्मश्-2 के नए वैरिएंट से ही नहीं, बल्कि खोस्ता-2 जैसे हर कोरोना वायरस से बचा सके। चूंकि मौजूदा वैक्सीन्स कोरोना वायरस के हर प्रकार से लड़ने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए हमें इनकी डिजाइन और फॉमूर्ला को और बेहतर करने की जरूरत है।

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