जानिए गर्भकालीन मधुमेह क्या है, कारण, लक्षण और चिकित्सा उपचार

गर्भावस्था (Pregnancy) हर महिला के लिए एक खास अहसास होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। कई बार तो यह बदलाव कुछ गंभीर बीमारियों को भी जन्म दे देते हैं। उन्हीं बीमारियों में से एक जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) भी है। जेस्टेशनल डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान पहली बार इसका निदान किया जाता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज अक्सर हाई ब्लड शुगर का कारण बनती है, जिससे आपकी गर्भावस्था और बच्चे का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित होता है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ आहार खाने, व्यायाम करने और जरूरी हो तो दवा लेने से जेस्टेशनल डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वैसे तो बच्चे को जन्म देने के बाद जेस्टेशनल डायबिटीज की समस्या दूर हो जाती है। लेकिन अगर आप पहले से ही जेस्टेशनल डायबिटीज से ग्रसित हैं, तो आपको टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा है।

28 मई को इंटरनेशनल विमेंस हेल्थ डे (International Women's Health Day) मनाया जाएगा। इस अवसर पर क्रिटीकेयर एशिया मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पीटल की ऑब्स्टेट्रिशियन ओर गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. शिफा खान कहती हैं कि 18 साल के अनुभव में मैंने कई बच्चों को ऐसी माओं की कोख से जन्म लेते देखा है, जिन्हें वयस्कता में टाइप 2 डायबिटीज थी। जबकि एक तिहाई महिलाएं गर्भावस्था के बाद इससे पीड़ित होती हैं। चूंकि यह स्वास्थ्य स्थिति एक ही बार में मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर बीमारी का कारण बनती है, इसलिए इसके लक्षणों को बेहतर ढंग से समझना जरूरी है।

मां-बच्चे में देखे गए जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षण

    जेस्टेशनल डायबिटीज में बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
    कई बार बच्चे दिल की बीमारी और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैं।
    बच्चा समय से पहले पैदा हो सकता है ।
    बार-बार प्यास लगना और ज्यादा भूख लगना भी जेस्टेशनरल डायबिटीज के लक्षण हैं।
    जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण एक मां को गर्भपात और समय से पहले होने वाली मौतों का भी सामना करना पड़ता है।
    पीसीओडी और डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री भी महिलाओं में इस रोग की संभावना को बढ़ाती है।
    गर्भावस्था के दौरान बार-बार पेशाब आना भी जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षणों में से एक है।

जेस्टेशनल डायबिटीज का निदान

जेस्टेशनल डायबिटीज का निदान दो चरणों वाली प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। जिसकी शुरुआत ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट से होती है। इसमें आपको एक पेय में 750 ग्राम ग्लूकोज मिलाकर पीना होगा। जिससे आपका ब्लड शुगर बढ़ जाएगा। दो घंटे बाद यह देखने के लिए ब्लड शुगर टेस्ट किया जाएगा कि चीनी ने आपकी बॉडी को कैसे हैंडल किया। अगर ब्लड शुगर लेवल 140 mg/dl से ज्यादा है , तो आपको 30 मिनट, 1 घंटे और 2 घंटे के अंतराल में ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट की जरूरत पड़ेगी। अगर ब्लड शुगर लेवल सामान्य नहीं आता, तो मेडिकल इंटरवेंशन की सलाह दी जाती है। हर बीमारी की तरह जल्द निदान गर्भावस्था के दौरान और बाद में मां और बच्चे दोनों में होने वाली जटिलताओं को कम करता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज के जोखिम को कैसे करें कम

जब बात जेस्टेशनल डायबिटीज को रोकने की हो, तो इसकी कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन गर्भवस्था से पहले आप जितनी स्वस्थ आदतें अपना सकते हैं, उतना अच्छा है। यदि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है, तो कुछ हेल्दी ऑप्शन आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करेंगे।

    गर्भवती होने से पहले स्वस्थ आहार खाने, एक्टिव रहने और वजन कम करने से जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।
    इस समस्या से ग्रसित महिलाओं को नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए।
    सब्जियां, साबुत अनाज, फल और लीन प्रोटीन को खासतौर से अपने आहार का हिस्सा बनाएं।

इस बात का रखें विशेष ध्यान

जेस्टेशनल डायबिटीज लंबे समय में कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है। इसका समाधान लक्षणों की समय पर पहचान और सही जांच कराना है। अगर आप एक और बच्चा पैदा करने के योजना बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि आपको फिर से जेस्टेशनल डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में जीवनशैली में कौन से बदलाव करने चाहिए , इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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