आयुर्वेद से जाने क्यों खाने के बाद सोना है गलत

दिन में नहीं सोना चाहिए , ये बात कभी न कभी आपने जरूर सुनी होगी। और नंजरअंदाज भी किया होगा। क्योंकि दोपहर में खाना खाने के बाद आंख अपने आप ही बंद होने लग जाती है। आलस इतनी होती है कि व्यक्ति डाइनिंग टेबल से उठकर सीधे बिस्तर पर ही जाकर लेटता है। लेकिन आयुर्वेद में ऐसा करने के लिए सख्त माना है। इससे शरीर में कई तरह के रोग पैदा हो जाते है।

आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर एश्वर्या संतोष ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट को शेयर कर खाने के बाद सोने से होने वाले परिणामों को बताया है। वह लिखती हैं कि आयुर्वेद में दिन में सोने के कुछ नियम बनाए गए हैं जैसे – दिन में कौन सो सकते हैं, खाने के कितने घंटे के बाद सोना चाहिए, खाने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए।

​दिन में खाने के बाद सोने से क्या होता है

खाने के बाद व्यक्ति को सोना नहीं चाहिए। आयुर्वेद की विशेषज्ञ बताती हैं कि जब आप दोपहर में खाने के बाद सोते हैं तो शरीर में स्निग्धा गुण(unctuous quality) की मात्रा बढ़ जाती है। जो शरीर में कफ दोष को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। चूंकि पाचन क्रिया के दौरान कफ दोष प्राकृतिक रूप से ज्यादा होता है। ऐसे में यदि हम सो जाते हैं तो यह नष्ट हो जाता है। और पेट में कई तरह की परेशानी शुरू हो जाती है।

​सिर्फ इन्हें है दिन में सोने की छूट

दिन में केवल ऐसे लोगों को सोना चाहिए जो शारीरिक या मानसिक रूप से काम करके थके हुए हैं। इसके अलावा बुढ़े, बच्चे और कम वजन वाले लोगों को भी दिन में सोने की छूट है। विशेषज्ञ बताती हैं कि केवल गर्मी में ही दिन में सोने की सलाह दी जाती है। जबकि ऐसे लोगों को नहीं सोना चाहिए जो मोटे हैं, गैस से पीड़ित, ज्यादा जंक फूड खाते हैं।

​दिन में सोने से होते है ये परिणाम

विशेषज्ञ बताती हैं कि जो लोग दिन में अस्वस्थ नींद लेते हैं वे आमतौर पर शरीर में कफ की वृद्धि के समस्या से परेशान होते हैं। साथ ही सिरदर्द, शरीर में भारीपन, कमजोर पाचन अग्नि, क्रोनिक राइनाइटिस , नाड़ियों में रुकावट, सूजन आदि से जूझ रहे होते हैं।

लंच के कितने देर बाद सोएं

डॉ. ऐश्वर्या के अनुसार दोपहर का भोजन करने के बाद कम से कम 1 से 1.5 घंटे बाद सोना चाहिये। खाने के तुरंत बाद 100 कदम जरूर चलें, थकान महसूस होने पर बैठे हुए एक छोटी झपकी ले सकते हैं।

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