मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में तीन नए लक्षणों की पहचान

दुनिया अभी भी कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus pandemic) के संघर्ष से जूझ रही है। ऐसे में मंकीपॉक्स (Monkeypox) संक्रमण ने आकर पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है। यह बीमारी तेजी से कई देशों में फैल रही है।

दुनिया भर में मंकीपॉक्स के मामलों को बढ़ते देख वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। भारत सहित दुनियाभर में इसके मामले 16 हजार के आंकड़े को पार कर गए हैं।

मंकीपॉक्स एक वायरल संक्रमण है जिसमें चेचक के संक्रमण के समान लक्षण होते हैं। बुखार और त्वचा पर दाने होना इसके आम लक्षण हैं। इस बीच चिकित्सकों ने मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में तीन नए लक्षणों की पहचान की है।

मंकीपॉक्स के 3 नए लक्षण
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन मंकीपॉक्स की अब तक की सबसे बड़ा अध्ययन है। यह अध्ययन 27 अप्रैल से 24 जून के बीच चला, जिसमें 528 मामले शामिल हैं। त्वचा की समस्याओं और चकत्ते के साथ शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन में कई संक्रमित लोगों में ऐसे लक्षण थे, जो अभी तक मंकीपॉक्स की वर्तमान चिकित्सा परिभाषाओं में पहचाने नहीं गए हैं। इन लक्षणों में जननांग में घाव, मुंह में घाव और गुदा पर घाव शामिल हैं।

दस में से एक व्यक्ति के जननांग घाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि दस में से एक व्यक्ति को जननांग हिस्से में केवल एक ही घाव था और अध्ययन में शामिल 15 प्रतिशत लोगों को गुदा या मलाशय में दर्द था। कुछ लोगों को गुदा और मुंह में घाव जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके वजह से उन्हें दर्द और भोजन निगलने में कठिनाई हो रही है।

सिफलिस या हर्पीज से मिलते हैं लक्षण
मंकीपॉक्स के ये नैदानिक लक्षण यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) जैसे सिफलिस या हर्पीज के समान हैं। यही वजह है कि इनका आसानी से पता नहीं चलता है और संक्रमण फैल सकता है।

क्या मंकीपॉक्स यौन संचारित रोग है?
लंदन में क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ में एचआईवी एक्सपर्ट डॉक्टर जॉन थॉर्नहिल ने बताया कि यह समझना जरूरी है कि मंकीपॉक्स सीधे तौर पर यौन संचारित संक्रमण नहीं है लेकिन यह निकट शारीरिक संपर्क के माध्यम से फैल सकता है।

मंकीपॉक्स को रोकने के उपाय
शोध के विशेषज्ञों का सुझाव है कि जोखिम वाले समूहों के साथ बड़े लेवल पर काम होना चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बेहतर किया जाना चाहिए। लोगों को बीमारी और लक्षणों के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए। समय पर निदान करना और उचित उपचार के जरिए इसे फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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