कोटवारों की सेवाभूमि के मामले पर यथास्थिति कायम रखने के निर्देश-हाईकोर्ट

जबलपुर

 मप्र हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के जरिये कोटवारों की सेवाभूमि को नजूल घोषित करने के मामले पर यथास्थिति कायम रखने के निर्देश दिए । चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील लंबित रहने तक कोटवारों की सेवाभूमि से छेड़छाड़ न की जाए। कोर्ट ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी कोटवारों की अपील पर विचार के दौरान 28 फरवरी 2017 के आदेश से प्रभावित हुए बिना निर्णय लेंगे।

छिंदवाड़ा निवासी बनिया बाई मेहरा सहित 17 कोटवारों की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा व अमित स्थापक ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा व बैतूल जिला अंतर्गत आने वाले गांवों के कोटवार हैं। मालगुजारी व जमींदारी के जमाने में सौ वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों को सेवाभूमि प्रदान की गई थी। इस सेवाभूमि पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी खेती करके ग्राम कोटवार अपने परिवार का भरण-पोषण करते चले आ रहे हैं। उनके पास जीवन-यापन का यह एकमात्र जरिया है। इसके बावजूद सेवाभूमि को हड़पने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। एक तरफ भूमाफिया तो दूसरी तरह खुद शासन-प्रशासन अनुचित आदेश जारी कर परेशान कर रहा है। प्रमुख सचिव राजस्व ने 28 फरवरी, 2017 को एक आदेश जारी कर सेवाभूमि को नजूल घोषित करने की दिशा में कदम उठाया गया। इस रवैये को 2017 में ही याचिका के जरिये चुनौती दी गई थी। जिस पर अंतरिम आदेश पारित हुआ। लेकिन चार वर्ष बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील के लिए स्वतंत्र करते हुए याचिका निरस्त कर दी। इसी आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट की युगलपीठ के समक्ष अपील दायर की गई ।

केवल 17 याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत

अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में दी गई अंतरिम राहत महज 17 याचिकाकर्ताओं पर लागू होगी। दूसरे कोटवारों को नए सिरे से अपील के जरिये हाई कोर्ट आना होगा। उनकी अपील पर विचार के बाद ही उन्हें इस अंतरिम राहत का लाभ मिल सकेगी।

 

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