सर्दी का सितम, उत्तराखंड में बर्फबारी, इन राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 24 घंटे के बाद शीतलहर में थोड़ी कमी आ सकती है। आने वाले 3-4 दिन ठंड से कोई खास राहत मिलने की संभावना नहीं है।

नईदिल्ली
पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी के चलते मैदानी राज्यों में शीतलहर के कारण सर्दी का कहर जारी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे राज्यों में घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है। उत्तर प्रदेश में कई हिस्सों में भीषण कोल्ड-डे की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 3-4 दिन ठंड से कोई खास राहत मिलने की संभावना नहीं है। आईएसडी ने 12 जनवरी तक 19 जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, महाराजगंज, संत कबीर नगर, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया आदि शामिल हैं।

उत्तराखंड के बारिश की संभावना

वहीं मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट वेदर का कहना है कि अगले 24 घंटों के दौरान गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है। वहीं 11 से 13 जनवरी के बीच हिमाचल और उत्तराखंड के अलावा जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश और हिमपात होने की पूरी संभावना है।

अगले दो दिन इन राज्यों में रहेगा घना कोहरा

मौसम विभाग ने कहना है कि आने वाले 2 दिन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा रहेगा। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में 2 दिन कोल्ड डे की स्थिति बनी रहेगी।

ओडिशा में भी शीतलहर का कहर

मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में भी शीतलहर का कहर जारी रहेगा। यहां कोरापुट जिले के सिमिलिगुड़ा में न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ओडिशा के 14 मौसम केंद्रों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। राजधानी भुवनेश्वर में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.7 डिग्री कम 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

शीत लहर की स्थिति में कमी आने की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 24 घंटे के बाद शीतलहर में थोड़ी कमी आ सकती है। दो पश्चिमी विक्षोभों के बीच एक बड़े अंतर के कारण भीषण ठंड का लंबा दौर देखने को मिला, जिसका मतलब है कि बर्फ से ढके पहाड़ों से ठंडी हवाएं सामान्य से अधिक समय तक चली।

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