गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स से दो साल बाद भारत-चीन की सेना ने वापसी शुरू की

नई दिल्ली
 भारत और चीन की सेनाओं ने गुरुवार को घोषणा करके बताया कि उन्होंने ईस्टर्न लद्दाख के गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स (पट्रोलिंग पॉइंट-15) इलाके से पीछे हटना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही दो साल पहले जो तनाव शुरू हुआ था, वह सुलझने के मुकाम पर आ गया है। गतिरोध के आखिरी पॉइंट पर भी सैनिक पीछे हटने शुरू हो गए। हालांकि एलएसी पर डेमचॉक और डेपसांग एरिया में अब भी गतिरोध कायम है, लेकिन यह विवाद कई वर्ष से चल रहा है। गुरुवार को भारत और चीन की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि 16वें दौर की कोर कमांडर स्तर के बीच बनी सहमति के हिसाब से यह फैसला लिया गया। यह सीमाई इलाके में शांति के लिए अच्छा है। ईस्टर्न लद्दाख में ही पैंगोंग, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स एरिया से सैनिक पीछे हट गए हैं, लेकिन चुनौती अब भी कई हैं। एलएसी के दोनों तरफ दोनों देशों ने हजारों की संख्या में सैनिक तैनात किए हैं, जिन्हें पीछे करना यानी शांति वाली स्थिति में फिर से भेजना असल चुनौती है।

दो बड़े पॉइंट्स पर बात नहीं

    चीन के साथ गतिरोध के दो बड़े पॉइंट डेमचॉक और डेपसांग अब भी बरकरार हैं।
    हालांकि इन जगहों पर कई साल से भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है।
    चीन का कहना है कि पुराना मसला है, इसलिए इस पर फिलहाल बात नहीं होगी।

पूरी तरह शांति बहाली अभी नहीं

    पूर्वी लद्दाख में ही पैंगोंग एरिया, गोगरा, हॉट स्प्रिंग एरिया से डिसइंगेजमेंट हो गया है लेकिन चुनौती अब भी कई हैं।

    एलएसी के दोनों तरफ दोनों देशों ने हजारों की संख्या में सैनिक तैनात किए हैं, जिन्हें पीछे करना यानी शांति वाली स्थिति में फिर से भेजना असल टास्क है।

    जब दो साल पहले तनाव शुरू हुआ तो युद्ध स्तर की तैयारी के तहत भारी संख्या में सैनिक तो तैनात किए ही गए, साथ ही तोप, टैंक, मिसाइल, रॉकेट लॉन्चर, फाइटर जेट भी तैनात हुए।

    अभी बातचीत के जरिए जो डिसइंगेजमेंट हुआ है उसका मतलब है कि दोनों देशों के सैनिक पीछे हुए हैं। यानी वे आमने-सामने नहीं हैं, लेकिन पीछे की तरफ दोनों देशों की तैनाती पूरी है।

पहले वाली स्थिति कब आएगी?

    पहले वाली स्थिति तब आएगी, जब दोनों देशों के सैनिक जो हजारों की संख्या में एलएसी के पास (आमने-सामने नहीं, बल्कि डेप्थ एरिया में) तैनात हैं, वे भी कम हों। साथ ही वहां तैनात सैन्य साजो सामान कम हो।

    यह तभी हो सकता है जब दोनों देशों के बीच फिर भरोसा कायम हो। गलवान के बाद वह भरोसा टूट गया था। भरोसा फिर से कायम होने में वक्त लग सकता है।

क्या SCO समिट में मिलेंगे मोदी-शी?
भारत-चीन की सेनाओं के अचानक नरम रुख अपनाने के ऐलान के बाद अब सारी नजरें अगले हफ्ते शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन पर टिक गई हैं। 15 और 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग आमने-सामने होंगे। हालांकि, सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के मिलने के बारे में अभी तक विदेश मंत्रालय की ओर से कोई संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन माना जा रहा है कि तनातनी के दौर में पहली बार आए नरम रुख से बैठक की संभावनाएं बढ़ गई हैं। मोदी सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। शी चिनफिंग पहले में वर्चुअली शामिल होने वाले थे, लेकिन अब वह भी आ रहे हैं।

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