भारत के लिए तिहरा खतरा था अल जवाहिरी, तालिबान-अलकायदा में संबंध बड़ा संकट

नई दिल्ली।

भारतीय अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि अयमान अल जवाहिरी का मारा जाना भारत में अलकायदा समर्थकों और सहयोगियों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। हालांकि, उन्होंने तालिबान द्वारा जवाहिरी को काबुल में पनाह दिए जाने पर चिंता जताई और कहा कि मुख्य रूप से भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी संगठनों को भी इसी प्रकार संरक्षण दिया जा सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि अयमान अल जवाहिरी भारत के लिए तिहरा खतरा था।

मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा, अल जवाहिरी और उसका संगठन ने सिर्फ भारत में कट्टरता को बढ़ावा दे रहा था बल्कि कश्मीर में आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति भी कर रहा था। पिछले दिनों हिजाब प्रकरण से लेकर नुपुर शर्मा के बयान पर उत्पन्न हालात पर भी किसी न किसी रूप में उसकी संलिप्त नजर आती है। भारत को उससे तिहरा खतरा था। एक कट्टरता को बढ़ावा देना, दूसरे कश्मीरी आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति और तीसरे कश्मीर में आतंकी भेजे जाने की संभावना। अफगानिस्तान में जवाहिरी की मौजूदगी यह भी प्रदर्शित करती है कि तालिबान सरकार लगातार आतंकियों को प्रश्रय दे रही थी जो लगातार भारत के लिए भी खतरा बने हुए हैं।

तालिबान-अलकायदा में संबंध बड़ा संकट
वहीं, घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि अलकायदा समर्थक भारत में प्रचार अभियान चला रहे थे और संगठनात्मक तंत्र को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रहे थे। जवाहिरी का मारा जाना भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा (एक्यूआईएस) जैसे उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के मंसूबों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अधिकारियों ने कहा कि तालिबान और अलकायदा के बीच बेहद घनिष्ठ संबंधों की बात इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि जवाहिरी काबुल के एक पॉश इलाके में रह रहा था। अल कायदा-तालिबान के बीच यह करीबी गठजोड़ भारतीय हितों के खिलाफ है। अल-कायदा को पनाह दे रहा तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान स्थित संगठनों को भी इस तरह की सुविधाएं दे सकता है, जो मुख्य रूप से भारत को निशाना बनाते हैं।

तालिबान में अंतर्कलह तेज होगी
इसके अलावा भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि तालिबान के भीतर अंतर्कलह तेज हो सकती है, क्योंकि अल-कायदा के बहुत करीब माना जाने वाला हक्कानी नेटवर्क जवाहिरी के बारे में जानकारी अमेरिकी अधिकारियों को देने का बदला लेने की कोशिश कर सकता है। भारत के सामने एक चिंताजनक तथ्य यह है कि अल-कायदा से मोहभंग होने की सूरत में इसके सदस्य इस्लामिक स्टेट और उसके क्षेत्रीय सहयोगी इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) से जुड़ सकते हैं।

 

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