जोशीमठ के क्षतिग्रस्त भवनों में क्रैकोमीटर से दरारों की तेजी का पता लगाएँगे

जोशीमठ में भू-धंसाव की घटनाओं को लेकर उत्तराखंड ही नहीं पूरा देश इससे चिंतित है. राज्य और केंद्र सरकार इस पर नजर बनाए हुए है. जोशीमठ को कैसे बचाया जाए, इस पर सरकारी एजेंसियां काम कर रही हैं.

जोशीमठ
जमीन में दरारें और लोगों के दर्द से इन दिनों जोशीमठ बदहाल है. उत्तराखंड ही नहीं पूरा देश इससे चिंतित है. राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार इस पर पूरी नजर बनाए हुए है. कई आरोप भी लग रहे हैं. इन सबके बीच प्राथमिकता है कि जोशीमठ को कैसे बचाया जाए. इस पर सरकारी एजेंसियां काम कर रही हैं.

इसी क्रम में जोशीमठ के क्षतिग्रस्त भवनों में सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) द्वारा क्रैकोमीटर लगाए जा रहे हैं. इसके जरिए ये पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मकानों को कितना नुकसान हो रहा है. मकानों में आईं दरारें बढ़ रही हैं या नहीं.

इसके साथ ही सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट इमारतों पर Unusable (रहने योग्य नहीं) और Assess Further (आगे परीक्षण योग्य) जैसे स्टीकर भी लगा रहा है. सीबीआरआई 10 दिनों में 3500 इमारतों का आकलन करेगा. इसके बाद अपनी रिपोर्ट पेश करेगा.

भू-धंसाव और घरों में आई दरारों के बीच चमोली जिला के आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि नगर क्षेत्र के 9 वार्ड में 760 प्रभावित भवनों को अभी तक चिन्हित किया जा चुका है. जिसमें से 128 भवनों को असुरक्षित जोन के अंतर्गत रखा गया है. जिला प्रशासन ने अस्थायी राहत शिविरों के रूप में 51 भवनों के 344 कक्षों का चिह्नीकरण कर लिया है. इसमें 1425 व्यक्तियों को ठहराया जा सकता है.

उधर, नगर पालिका के बाहर पीपलकोटी में अस्थायी राहत शिविरों के रूप में 20 भवनों के 491 कमरों को चयनित किया गया है, जिसमें कुल 2205 लोगों को ठहराया जा सकेगा. सरकार भी जोशीमठ मामले को लेकर एक्शन मोड में है.

शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट की बैठक से पहले जोशीमठ को लेकर बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में फिलहाल किसी का घर नहीं तोड़ा जाएगा. अब तक सरकार 90 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुकी है. इसके अलावा प्रभावित लोगों को राहत राशि देने पर कहा कि डेढ़ लाख रुपये की राशि प्रभावित लोगों को देने की कार्रवाई जारी है. सीएम धामी ने कहा कि जोशीमठ में प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा के लिहाज से वहां से निकाला जा रहा है.

गौरतलब है कि भू-धंसाव की घटनाएं सामने आने के बाद जोशीमठ के लोगों में एनटीपीसी के खिलाफ नाराजगी है. ये नाराजगी केवल जोशीमठ तक ही सीमित नहीं है. आसपास के क्षेत्रों में भी लोग नाराज हैं. लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी (NTPC) द्वारा किए गए ब्लास्ट से ही जोशीमठ तबाह हो रहा है.

लोगों का कहना है कि एनटीपीसी (NTPC) द्वारा किए गए ब्लास्ट से ही जोशीमठ तबाह हो रहा है. इस बात में कितना सच है, उत्तराखंड सरकार इसकी जांच कराने में जुट गई है. भू-धंसाव के कारणों का पता लगाने के लिए 8 इंस्टीट्यूट स्टडी कर रहे हैं. इसमें एनटीपीसी परियोजना के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षण चल रहा है.

मुख्य सचिव उत्तराखंड, एसएस संधू, का कहना है कि इस स्टडी की रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि 8 संस्थान इस वक्त जोशीमठ -धंसाव के कारणों की जांच कर रहे हैं. एनटीपीसी का भी काम अभी बंद है. इस संकट के लिए एनटीपीसी जिम्मेदार है कि नहीं, इसकी भी जांच होगी.

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