भारत की सबसे गुप्त जगह को दुश्मन का सैटलाइट भी नहीं देख पाएगा

0
1
INS varsha

INS Varsha: नई दिल्ली. इस समय भारत के परमाणु हथियारों पर आई एक अमेरिकी रिपोर्ट काफी चर्चा में है। अमेरिकी साइंटिस्ट फेडरेशन (FAS) की रिपोर्ट-2022 में भारत के एक सुपर सीक्रेट बेस के बारे में बताया गया है, जिसे विशाखापत्तनम से 70 किमी दूर रामबिल्ली में तैयार किया जा रहा है। इसका नाम है आईएनएस वर्षा (INS Varsha)।

रिपोर्ट का दावा है कि भारत अपने परमाणु पनडुब्बी के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी कर रहा है। अगस्त 2022 में नेवी ने प्रोजेक्ट वर्षा से संबंधित निर्माण कार्य के लिए EOI भी जारी किया था। यह निविदा की शुरुआती प्रक्रिया होती है। वैसे, भारत के अंडरग्राउंड नेवल बेस के बारे में जानकारी सामने आना कोई नई बात नहीं है। भारत की परमाणु पनडुब्बियों के बेस के बारे में पता चलने से पाकिस्तान कई साल से खौफ में है। INS वर्षा के तैयार होने से भारत की नौसेना रक्षा क्षमताओं में जबर्दस्त इजाफा होगा। यह भी समझना महत्वपूर्ण है कि इसके लिए विशाखापत्तनम को ही क्यों चुना गया?

पाकिस्तान ने तो जासूस लगा दिए थे

जी हां, बात आज से करीब 8 साल पहले की है। NIA के जरिए देश को पता चला कि प्रोजेक्ट वर्षा की जानकारी जुटाने के लिए पाकिस्तान ने जासूस लगा दिए थे। श्रीलंका में तैनात दो पाक खुफिया अधिकारियों ने दो जासूसों को प्रोजेक्ट वर्षा के बारे में जानकारी जुटाने का मिशन सौंपा था। NIA ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि इन जासूसों से कहा गया था कि वे कोलंबो में भारतीय नेवी और सेना के अधिकारियों से मेलजोल बढ़ाएं और इसके लिए महिलाओं और कैश की व्यवस्था करने की भी बात कही गई थी। हाल में आई एक फिल्म में भी कोलंबो में भारतीय अधिकारी के इस तरह के जाल में फंसने की कहानी दिखाई गई है।

एक जासूस का नाम थमीम अंसारी था, जिसे डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने वाले के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया था। कहा गया कि वे ‘भारत की ताकत’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं। अंसारी से विशाखापत्तनम नेवल बेस के बारे में जानकारी जुटाने को कहा गया था। प्रोजेक्ट वर्षा पर नजर रखने के लिए उसे नेवल स्टेशन के पास रहने को भी कहा गया। फिल्मी कहानी की तरह जासूसों को कहा गया कि वे होटल, बार, सिनेमा हॉल जाएं और रईस की तरह पेश आएं। हालांकि दोनों पकड़ लिए गए।

क्या है INS वर्षा, क्यों है इतना गुप्त

पहले यह जान लीजिए कि अंडरग्राउंड नेवल बेस कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है। कोल्ड वॉर के समय इसका काफी इस्तेमाल हो चुका है। सोवियत संघ ने ऐसे कई बेस बनाए थे, जहां से पनडुब्बियों को संचालित किया जाता था। कुछ बेस पर जोम्स बॉन्ड की फिल्में भी बन चुकी हैं। सोवियत पतन के बाद कई बेसों को छोड़ दिया गया। हाल के वर्षों में ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने पूर्वी तट पर छह अंडरग्राउंड बेस बना लिए हैं और वहां से सबमरीन संचालित होती हैं।

भारत में पूर्वी नेवल कमांड का मुख्यालय विशाखापत्तनम में ही है। बताते हैं कि भारतीय नौसेना के 50 से ज्यादा शिप यहां से संचालित होते हैं। जमीन से घिरा नेचरल हार्बर नेवल बेस के लिए बेहतरीन जगह है। हालांकि विशाखापत्तनम पोर्ट पर कंटेनर जहाजों के आने से ट्रैफिक ज्यादा रहता है। ऐसे में नए नेवल बेस की जरूरत महसूस की जा रही है।

अंडरग्राउंड बेस को नहीं देख पाएगा दुश्मन

दरअसल, नेवी में सबसे महत्वपूर्ण एसेट परमाणु पनडुब्बी होती है और इसके बारे में सारी जानकारियां गुप्त रखी जाती हैं। सबसे ज्यादा खतरा दुश्मन के सैटलाइट से रहता है। सैटलाइट के जरिए दुश्मन देश पोर्ट की हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं। खास बात यह है कि परमाणु पनडुब्बी महीनों तक समंदर की गहराई में छिपी रह सकती है। ऐसे में समुद्र की 200 मीटर गहराई में छिपी पनडुब्बी का पता लगाना लगभग असंभव होता है।

लेकिन जब ये पनडुब्बियां पोर्ट पर आती या जाती हैं तो दुश्मन आसानी से उसे देख सकते हैं। इससे परमाणु पनडुब्बी की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है। क्लास और पनडुब्बी की संख्या पता चलने से दुश्मन भी अलर्ट हो जाएगा। युद्ध जैसी स्थिति के लिए कोई भी देश नहीं चाहता कि ऐसी जानकारी सामने आए इसीलिए अंडरग्राउंड नेवल बेस की जरूरत महसूस हुई।

विशाखापत्तनम के पास रामबिल्ली ही क्यों?

आपके मन में भी शायद सवाल हो कि यह गुप्त बेस रामबिल्ली में ही क्यों बनाया जा रहा है? दरअसल तटीय गांव रामबिल्ली में कई अंडरग्राउंड चैंबर हैं। इससे सबमरीन सुरंग के जरिए आ और जा सकती है। जी हां, मतलब सबमरीन को समंदर की सतह पर आने की जरूरत ही नहीं होगी। दुश्मन की सैटलाइटें उसकी झलक भी नहीं देख पाएंगी। इससे हमारी परमाणु पनडुब्बियों की सीक्रेट तैनाती के बारे में भी चीन, पाकिस्तान या किसी तीसरे मुल्क को भनक तक नहीं लगेगी।

INS वर्षा के पास रिपेयर और मेटेंनेंस सुविधा भी होगी। क्रू मेंबर के लिए तमाम सुविधाएं होंगी। यह बेस इतना बड़ा होगा कि इसमें बड़ी परमाणु पनडुब्बियों जैसे अरिहंत क्लास, आगामी S5 और परमाणु अटैक सबमरीन को सुरक्षित रखा जा सकेगा। भारत के परमाणु शस्त्रागार तक दुश्मन कभी पहुंच नहीं पाएगा और जवाबी हमले में उसे भारी नुकसान पहुंचाया जा सकेगा।

Bhabha Atomic Research Centre के करीब होना भी रामबिल्ली में आईएनएस वर्षा बनाए जाने की एक प्रमुख वजह है। इस सीक्रेट बेस के भीतर ही परमाणु रिएक्टरों का निर्माण और फिटिंग संभव हो सकेगी। INS वर्षा में कम से कम 12 बड़ी परमाणु पनडुब्बियां रखी जा सकेंगी। डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन भी यहां से ऑपरेट की जा सकती है। यूं समझिए कि आईएनएस वर्षा से भारत की ताकत बढ़ने वाली है तभी कई साल से पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी हुई है।