आठ कॉलेजों ने जल्द नहीं सुलझाया विवाद तो सरकार को लौटाना होगा अनुदान

आरा
समय रहते अगर संबद्ध कॉलेजों का विवाद समाप्त नहीं हुआ तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कॉलेजों के दो गुटों में लड़ाई का खामियाजा सभी कॉलेज कर्मियों को भुगतना पड़ सकता है। राज्य सरकार ने काफी समय से विवि में पड़े अनुदान को वापस लेने का निर्णय लिया है। ऐसे कॉलेज, जहां विभिन्न कारणों से अनुदान राशि वितरित नहीं हुई है, उस कॉलेज के लिए प्राप्त अनुदान विवि प्रशासन राज्य सरकार को वापस भेजेगा। वीर कुंवर सिंह विवि के विवादित संबद्ध कॉलेजों की अनुदान राशि लौटेगी। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने अनुदान वितरित नहीं होने पर राशि सरकार को भेजने को कहा है। बता दें कि राज्य सरकार से प्राप्त पिछले दो वित्तीय सत्र की अनुदान राशि का बंटवारा विवि के आठ संबद्ध कॉलेजों में नहीं हो पाया है।

इस आधार पर होना है वितरण  
नियम के अनुसार अनुदान का बंटवारा उसी कॉलेज में होना है, जहां शासी निकाय कार्यरत है। जबकि इन कॉलेजों में उत्पन्न विवाद के कारण तदर्थ समिति गठित है। कुछ जगह प्राचार्य पद का विवाद है। इधर, तदर्थ समिति की मौजूदगी में अनुदान वितरण नहीं हो सकता है। वहीं अनुदान की एक शर्त यह भी है कि सरकार की गाइडलाइन का पालन करने वाले कॉलेज को अनुदान दिया जा सकता है। इधर, स्थिति है कि चार से पांच कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने अनुदान वितरण से पूर्व 12 बिंदुओ पर रिपोर्ट जमा नहीं की है। इस कारण उनका अनुदान भी नहीं भेजा जा सका है। बता दें कि पिछले वर्ष एक कॉलेज की अनुदान राशि सरकार को लौटा दी गयी थी। अब तक उस कॉलेज को अनुदान नहीं मिला।

दो शैक्षणिक सत्रों का है अनुदान
विवि को बीते वर्ष में सरकार की ओर से दो शैक्षणिक वर्ष का अनुदान जारी किया गया था। इसमें अधिकतर कॉलेजों में राशि का वितरण शिक्षक और कर्मियों के बीच हो चुका है। आठ कॉलेज ही ऐसे हैं, जहां अनुदान नहीं गया है। शैक्षणिक सत्र 2009-12 और 2010-13 का अनुदान विवि में खाते में है। पीसी कॉलेज बक्सर, ईश्वर दयाल सिंह भगवत प्रसाद सिंह कॉलेज गढ़नोखा, बीएस कॉलेज हट्टा चेनारी, पटेल कॉलेज घुसिया खुर्द, महात्मा गांधी कॉलेज लहराबाद, वीर कुंवर सिंह महिला कॉलेज नासरीगंज, चौधरी चरण सिंह कॉलेज राजपुर और बीएन कॉलेज इंदौर रोहतास शामिल है। इन कॉलेजों को लाखों रुपये मिले हैं। अगर इन कॉलेजों में अनुदान जाता है तो एक शिक्षक को पांच लाख से अधिक अनुदान राशि मिलेगी।

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