इंडियन बैंक ने वापस लिए विवादित दिशा-निर्देश

नई दिल्ली
 विवाद बढ़ने के बाद इंडियन बैंक (Indian Bank) ने कर्मचारियों की भर्ती के 'भेदभावपूर्ण' दिशा-निर्देशों को वापस ले लिया है। बैंक ने कहा कि उसने चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रारूप से महिलाओं के गर्भावस्था से जुड़े सवालों को हटा दिया है। दिल्ली महिला आयोग (DCW) द्वारा इन दिशानिर्देश को ‘भेदभावपूर्ण’ करार देने के एक दिन बाद बैंक ने यह कदम उठाया। दिल्ली महिला आयोग (Delhi Commission for Women) ने इंडियन बैंक के महाप्रबंधक (HR) को समन जारी किया था। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के बाद मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) ने इस बारे में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भी पत्र लिखा था। उन्होंने मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।

यह था दिशा निर्देश
दिल्ली महिला आयोग ने ‘भेदभावपूर्ण’ दिशानिर्देश को वापस लेने से बैंक के कथित रूप से इनकार के बाद वित्तीय संस्थान को तलब किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक ने कथित तौर पर ऐसे नियम बनाए थे, जिसमें कहा गया कि यदि कोई महिला उम्मीदवार तीन महीने की गर्भवती है, तो उस को 'अस्थायी रूप से अयोग्य' माना जाएगा। साथ ही उसका चयन होने पर उसको तत्काल कार्यभार नहीं दिया जाएगा।

विभाग 1985 में ही कर चुका संशोधित
इंडियन बैंक ने अपने जवाब में आयोग को बताया कि उसने कोई भेदभावपूर्ण दिशा निर्देश जारी नहीं किये थे। बैंक ने कहा कि वह कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी मौजूदा दिशा-निर्देशों का ही पालन कर रहा है। हालांकि, इस तरह के एक दिशा निर्देश को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 1985 में ही संशोधित कर दिया गया था। डीसीडब्ल्यू के समन के बाद अब बैंक ने चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रारूप से महिलाओं के गर्भावस्था से जुड़े सवालों को हटा दिया है।

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