महबूबा मुफ्ती शहबाज शरीफ के सुर में सुर मिला रहीं? जानें जम्मू-कश्मीर मसले पर क्या बोलीं

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सुर में सुर मिलाती नजर आई हैं। शनिवार को उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के PM ने जम्मू-कश्मीर के मसले को हल करने और दोनों देशों के रिश्तों को अच्छा करने की बात कही तो यह होना चाहिए। महबूबा ने कहा, 'जैसे वाजपेयी जी के समय दोनों देशों ने बैठकर बात की थी, वैसे ही दोनों देश जम्मू-कश्मीर का हल निकालें तो यह देश के लिए भी अच्छा होगा।'

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मामला उलछा हुआ है। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर का मसला जटिल है। इसे जेल में तब्दील कर दिया गया है। यहां अब आए दिन मुठभेड़ होती रहती है। इस मसले को सुलझाना जरूरी हो गया है।' बता दें कि पीडीपी चीफ ने अनंतनाग में मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए ये बाते कहीं।

कश्मीर मामले पर भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर झूठ फैलाने पर भारत ने फिर पाकिस्तान को लताड़ लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत मिशन के प्रथम सचिव मिजिटो विनिटो ने कहा कि यह खेदजनक है कि पाकिस्तान के PM ने इस सभा में भारत पर झूठे आरोप लगाए। उन्होंने अपने देश में दुष्कर्मों को छिपाने और भारत के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ऐसा किया।

भारतीय राजनयिक मिजिटो विनिटो ने भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने से पहले पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकने की याद दिलाई। विंटो ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर पर दावा करने के बजाय इस्लामाबाद को सीमा पार आतंकवाद को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब अल्पसंख्यक समुदाय की हजारों की संख्या में युवा महिलाओं को एसओपी के रूप में अपहरण कर लिया जाता है, तो हम इस मानसिकता के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या आरोप लगाए?
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा था कि PAK भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ अमन चाहता है, लेकिन दक्षिण एशिया में स्थायी शांति व स्थिरता कश्मीर मुद्दे के उचित समाधान पर निर्भर करती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए शरीफ ने दावा किया, 'जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बदलने के लिए 5 अगस्त, 2019 को भारत के अवैध और एकतरफा कदम ने शांति की संभावनाओं को और कमतर किया है और क्षेत्रीय तनाव को भड़काया है।'

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