कोई मुस्लिम बीवी नहीं चाहती कि उसका पति 3 पत्नियां घर लाए-हिमंत सरमा

नई दिल्ली
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा इसे हर कोई चाहता है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुस्लिम महिला ये नहीं चाहती है कि उसका पति 3 और पत्नियों को घर लाए। इसके साथ उन्होंने कहा कि तीन तलाक को खत्म करने के बाद अब यूनिफॉर्म सिविल कोड को लाना होगा।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "हर कोई UCCचाहता है। कोई भी मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका पति 3 अन्य पत्नियों को घर लाए। किसी भी मुस्लिम महिला से पूछें। यूसीसी मेरा मुद्दा नहीं है, यह सभी मुस्लिम महिलाओं के लिए मुद्दा है। अगर उन्हें तीन तलाक को खत्म करने के बाद न्याय दिया जाना है।" उन्होंने ये भी कहा कि असम में मुस्लिम समुदाय का एक धर्म है लेकिन संस्कृति और मूल के दो अलग-अलग वर्ग हैं जिनमें से एक असम का मूल निवासी है। ये वर्ग चाहता है कि उन्हें विस्थापित मुसलमानों के साथ न मिला दिया जाए और हम इसपर काम कर रहे हैं।

सरमा ने कहा कि उपसमिति का गठन कर रिपोर्ट बनाई जाएगी और उसे पेश किया जाएगा, लेकिन ये सब कमेटी की रिपोर्ट होगी।

इस दौरान असम के CM सरमा ने गुजरात के निर्दलीय विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की गिरफ्तारी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि "उन्हें इस मामले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।"

वहीं, समान नागरिक संहिता पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा,'उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों और केंद्र द्वारा समान नागरिक संहिता को अपनाने के लिए केवल बयानबाजी चल रही है, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान अन्य मुद्दों से भटकाना है।'

हिमंत बिस्व सरमा मुख्यमंत्रियों और जजों के सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए समाननागरिक संहिता जरूरी है।  उन्होंने कहा, 'अगर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक खत्म करने न्याय दिलाया गया तो यूनिफॉर्म सिविल कोड को भी लागू करना चाहिए।'

आपको बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा राज्य की जनता से किया था। सीएम बनने के बाद उन्होंने हाल ही में कहा था कि इसकी ड्राफ्टिंग के लिए एक पैनल का गठन किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि समान नागरिक संहिता के गुण समझाने के लिए चौपाल बनाए जाएंगे। इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र के प्रयासों को "एक असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी कदम" कहा है।

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