ओपी राजभर ने भी अखिलेश यादव पर तल्ख किए तेवर, 24 घंटे में डबल अटैक

लखनऊ
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। आजम खान, शिवपाल यादव जैसे नेताओं की नाराजगी के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के भी तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। 24 घंटे के भीतर उन्होंने दो बार अखिलेश यादव पर खुलकर निशाना साधा है। एक तरफ जहां उन्होंने अखिलेश यादव पर एसी कमरे में बैठकर राजनीति करने का आरोप लगाया है तो दूसरी तरफ राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायकों के हंगामे को भी गलत बताया है।

सोमवार को यूपी विधानसभा में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई। इस दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। हाथों में पोस्टर बैनर लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। सपा गठबंधन के ही साथी और सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी के विधायकों ने नारेबाजी नहीं की। उन्होंने कहा कि यह परंपरा ठीक नहीं है।

राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामा ठीक नहीं: राजभर
ओपी राजभर ने एक टीवी चैनल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विरोध नहीं होना चाहिए था। आज हमारी पार्टी के सदस्यों ने कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि जो पुरानी व्यवस्था है, अभिभाषण पर विरोध का यह बंद होना चाहिए। हमने अपनी ओर से विराम लगाया है। कल से जितना विरोध करना है करिए। मैं पांच साल से यह देख रहा हूं। यह छठा साल है। मुझे अच्छा नहीं लगता। हम अपने हिसाब से बदलाव चाहते हैं और इसमें पहल की है।''  

सपा के लोग कहते हैं अखिलेश को निकलने को कहें
अखिलेश यादव को एसी कमरे से निकलकर क्षेत्र में जाने की सलाह देने पर ओपी राजभर ने कहा कि सपा के नेता ही उनसे मांग करते हैं कि वह अखिलेश यादव को ऐसा कहें। ओपी राजभर ने कहा, ''उनके लोग ही हमको राय देते हैं कि हमारे नेता से कहिए कि बाहर निकलें, नेताओं से मिले, संगठन का काम करें। हम नहीं कह सकते इसलिए आप कहिए। मैंने वही बातें कहीं हैं जो उनके लोग कहते हैं।

'पूरे मन से मेहनत नहीं, कमरे में बैठे रहेंगे?'
ओपी राजभर ने आरोप लगाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने पूरी मेहनत नहीं कि और अब भी कमरे में ही बैठे हैं। उन्होंने कहा, ''मैंने कल चार मीटिंग कराई है अपनी पार्टी की। चार मीटिंग हम करवा सकते हैं तो वह (अखिलेश यादव) नहीं कर सकते हैं? बैठे रहेंगे कमरे में? गठबंधन में हैं तो सबको मेहनत करनी पड़ेगी। ताकत पैदा करो, जिगर पैदा करो। 22 में हमने पूरी मेहनत की होती तो सत्ता में होते। असफलता कहती है कि सफलता के लिए पूरे मन से प्रयास नहीं किया गया।''

 

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