President Murmu News : मानवता को आईना दिखाता है साहित्‍य – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

President Murmu News : यह मेरी मध्य प्रदेश में 5वीं यात्रा है, आप सभी से मिले इस प्यार के लिए धन्यवाद। उन्मेष का अर्थ आंखों का खुलना भी होता है और फूलों का खुलना भी। हमारी परंपरा में "यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्" की भावना प्राचीन काल

Latest President Murmu News : उज्जवल प्रदेश, भोपाल. 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भोपाल में कहा, ‘आज 140 करोड़ देशवासियों का मेरा परिवार है। सभी भाषाएं और बोलियां मेरी अपनी हैं। हमारी परंपरा में ‘यत्र विश्वम् भत्येकनीडम्’ (जहां सारा विश्व चिड़ियों का एक घोंसला बनके रहे ) की भावना प्राचीनकाल से है। राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व के आदर्श का संगम हमारे देश में दिखाई देता रहता है।’

राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद मेरी सबसे ज्यादा यात्राएं मध्य प्रदेश में हुई है। यह मेरी मध्य प्रदेश में 5वीं यात्रा है, आप सभी से मिले इस प्यार के लिए धन्यवाद। उन्मेष का अर्थ आंखों का खुलना भी होता है और फूलों का खुलना भी। हमारी परंपरा में “यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्” की भावना प्राचीन काल से आधुनिक युग तक निरंतर व्‍यक्‍त होती जा रही है। राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व के आदर्श का संगम हमारे देश की चिंतन धाराओं में सदैव दिखाई देता है।

राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राजधानी भोपाल में भारत की लोक एवं जनजाति अभिव्यक्तियों के राष्ट्रीय उत्सव उत्कर्ष और उन्मेष उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे।  आज सुबह साढ़े ग्यारह बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भोपाल पहुंचने पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उनकी अगवानी की। विमानतल से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आयोजन स्थल रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार पहुंची। उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि आज 140 करोड़ देशवासियों का मेरा परिवार है और सभी भाषाएं व बोलियां मेरी अपनी हैं। हमारा सामूहिक प्रयास अपनी संस्कृति, लोकाचार, रीति-रिवाज और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षित रखने का होना चाहिए। हमारे जनजाति समुदाय के भाई-बहन और युवा आधुनिक विकास में भागीदार बनें।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी द्वारा संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से भोपाल में पहली बार 3 से 5 अगस्त तक भारत की लोक एवं जनजाति अभिव्यक्तियों के राष्ट्रीय उत्सव उत्कर्ष एवं उन्मेष का आयोजन हो रहा है। उत्कर्ष उत्सव में देश के 36 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 800 कलाकार लोक एवं जनजातीय प्रदर्शन कलाओं की सतरंगी छटा बिखेरेंगे। उत्सव का प्रसारण संगीत नाटक अकादमी के फेसबुक और यूट्यूब चैनल सहित संस्कृति विभाग के फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर किया जा रहा है।

उत्कर्ष में शाम 5 बजे से होंगी नृत्यों की प्रस्तुतियां

उत्कर्ष उत्सव में शाम 5 बजे से रवीन्द्र भवन के सभागार में भारत के लोक-नृत्य और जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी।   लेह एवं लद्दाख का जबरो नृत्य, नागालैंड का सुमी वार, गोवा का समय, सिक्किम का सिंधी छम, मध्यप्रदेश का राई एवं नरेरी, मेघालय का बांग्ला, महाराष्ट्र का लावणी, असम का बीहू, ओडिसा का सिंगारी, झारखंड का पाईका और आंध्र प्रदेश के टप्पेटा गुल्लू नृत्य की प्रस्तुति यहां होगी।

एशिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मेलन  

उन्मेष उत्सव एशिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मेलन है। इसमें बहुभाषी कविता पाठ, लेखन, आदिवासी कवि सम्मेलन, साहित्य के विषयों पर परिचर्चा, आजादी का अमृत महोत्सव पर कविता पाठ और साहित्य के उत्थान संबंधी विभिन्न विषय पर प्रबुद्धजन द्वारा विमर्श किया जाएगा। साथ ही पुस्तक मेला में साहित्य अकादमी और अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें बिक्री के लिए सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। उत्सव के दौरान साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात लेखकों पर बनी डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जायेगी।

उत्कर्ष उत्सव’ 3 से 5 अगस्त तक चलेगा। ‘उन्मेष उत्सव’ 3 से 6 अगस्त तक चलेगा। देशभर के 500 कलाकार इस कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुति देंगे। संस्कृति मंत्रालय के संगीत नाटक एवं साहित्य अकादमी, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश के सहयोग से यह आयोजन हो रहा है। पिछली बार शिमला में यह आयोजन हुआ था। मध्यप्रदेश में पहली बार हो रहा है।

साहित्य जुड़ता भी है और जोड़ता भी है

प्रेसिडेंट ने कहा, ‘साहित्य और कला ने मानवता को बचाए रखा है। साहित्य जुड़ता भी है और लोगों को जोड़ता भी है। हमारा सामूहिक प्रयास अपनी संस्कृति, लोकाचार, रीति-रिवाज और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षित रखने का होना चाहिए। हमारे जनजाती समुदाय के भाई-बहन और युवा आधुनिक विकास में भागीदार बनें।’

प्रेसिडेंट ने कहा, ‘भारत में 700 कम्युनिटी के आदिवासी, लेकिन उनकी भाषाएं इससे ज्यादा हैं। भाषाओं को बचाकर रखना लेखकों का कर्तव्य है। यह हम सभी का भी दायित्व है।’

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