गर्व है! जिनके लिए थे दूसरे देशों पर निर्भर, वह हथियार अब भारत खुद बनाएगा

 नई दिल्ली।

देश को आजाद हुए 74 साल से ज्यादा हो जाने के बावजूद कई सैन्य उपकरणों व हथियारों के मामले में हम अब भी अन्य देशों पर निर्भर हैं। हालांकि यह परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत ने विश्व स्तरीय हथियारों व सैन्य साजो-सामान का उत्पादन शुरू कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में ऐसे 101 उपकरणों व हथियारों की सूची जारी है, जिन्हें अब यहीं बनाया जाएगा। इनमें से कुछ खास के बारे में हम आपको विस्तार से बता रहे हैं। लंबी दूरी की टोही और निगरानी प्रणाली है जो 30 किलोमीटर तक के दायरे में नजर रखने में सक्षम है। आईटीबीपी के पास दो एलओआरओएस हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने 25 सीमावर्ती क्षेत्रों में एलओआरओएस की तैनाती की मंजूरी दी है। एक एलओआरओएस सिस्टम की कीमत करीब दो करोड़ रुपये होती है। अब तक इस्राइल समेत अन्य यूरोपीय देश ही इसका निर्माण करते थे।

दुश्मन के रॉकेट और मोर्टार की पहचान
स्वदेशी वेपन लोकोटिंग रडार (डब्ल्यूएलआर) के जरिए देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों में तीस किलोमीटर तक निगरानी की जा सकगी। इस तकनीक से दुश्मन द्वारा दागे गए मोर्टार और रॉकेट हमलों की जानकारी मिलती है। समय रहते सेना रोकने में जुट जाती है। ये तकनीक एक साथ सात तरह टार्गेट का पता कर सकती है।
 

एनएडीएस: ड्रोन को कर देगा ध्वस्त
भारतीय नौसेना के लिए नेवल एंटी ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) का निर्माण डीआरडीओ ने किया है। ये ड्रोन की पहचान कर उसे ध्वस्त कर सकता है। 2021 के गणतंत्र दिवस परेड की में इसका इस्तेमाल भी किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अहमदाबाद रोड शो में भी ये निगरानी में जुटा था। अब बड़े पैमाने पर निर्माण होगा।

रॉकेट 68 एमएम: हवा से हमला
रॉकेट 68 एमएम पृथ्वी पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को हवा से तबाह करने में सक्षम है। जगुआर और किरन एयरक्राफ्ट से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका वजन बिना फ्यूज के 4 किलोग्राम होता है और करीब तीन फीट लंबा होता है। विशेषज्ञों की मानें तो कम समय में एक साथ इससे कई हमले किए जा सकते हैं जिससे दुश्मन की कमर टूट सकती है।

लेजर से दुश्मन पर वार
डायरेक्ट एनर्जी वेपन (डीईडब्ल्यू) सिस्टम लेजर किरणों और ऊर्जा आधारित हथियार है जिसकी मदद से दुश्मन का अंत संभव है। इस तकनीक के जरिए दुश्मन देश की सेना और उसके आयुध भंडार के के साथ उसके हथियारों, मिसाइल और अन्य उपकरणों को एक झटके में तबाह किया जा सकता है। ब्रिटेन का इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेल गन वर्ष 2012 से इसका परीक्षण कर रहा है।

रसायनिक तत्वों की पहचान
सीबीआरएन मिनी यूजीवी (मानव रहित जमीनी वाहन) केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर हमलों की पहचान के साथ सैंपल एकत्र करता है। सैन्यबलों को कोई खतरा नहीं होता है। गति छह किलोमीटर प्रतिघंटा है। 18 सेंटीमीटर की ऊंचाई चढ़ सकता है। 50 सेंटीमीटर के गढ्ढों को पार कर सकता है। व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर अहमदनगर ने बनाया है।

Related Articles

Back to top button