शिमला: मन की आंखों से मर्ज को पहचान कर ठीक कर रहे दृष्टिबाधित, थैरेपी से इन रोगों को कर रहे ठीक

शिमला
अगर पीडि़तों की सेवा करने और आत्मनिर्भर बनने का जुनून हो तो दृष्टिबाधित होना रास्ते की बाधा नहीं बन सकता। मन की आंखों से मर्ज को पहचान कर ठीक किया जा सकता है। इसका उदाहरण राजधानी शिमला में लगी प्रदर्शनी में दिख रहा है। 'नेशनल फार द ब्लाइंड' संस्था से निकले प्रशिक्षु थैरेपी देकर मर्ज ठीक कर रहे हैं। थैरेपी से वे पैर का दर्द, माइग्रेन की समस्या, कंधे का दर्द, घुटने का दर्द दूर कर रहे हैं। दृष्टिबाधित होने के बावजूद लोगों की समस्या को जान पाना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है।

मुंबई की आरया होलीस्टिक सर्विसिस ऐसे दृष्टिबाधित लोगों को रोजगार प्रदान करती है। इस एजेंसी के माध्यम से तरह-तरह की थैरेपी से लोगों के मर्ज को ठीक करते हैं। शिमला में इस तरह की प्रदर्शनी पहली बार लगी है। आरया होलीस्टिक के संचालक अशोक पारिक ने बताया कि वह 2004 से सेवा दे रहे हैं। अब तक देश के प्रमुख शहरों में काम करते थे, लेकिन अब दूसरे शहरों में भी इसका विस्तार किया जा रहा है।

प्रदर्शनी प्रबंधक सिराज ने बताया इसमें देशभर के जाने माने एस्ट्रोलाजर, थैरेपीस्ट, होलीस्टिक हीलर्स ने भाग लिया। 12 साल से जगह-जगह पर प्रदर्शनियां लगाकर लोगों की समस्याओं को दूर करते हैं। प्रदर्शनी में दृष्टिबाधित लोगों को निश्शुल्क स्टाल देेते हैं, ताकि वे भी अपनी आजीविका कमा सकें। उन्होंने बताया कि शिमला में उनकी पहली बार इस तरह की प्रदर्शनी है।

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