राज्य का कृषि रत्न अवॉर्ड शरद पवार के भतीजे ने नहीं लिया, राज्यपाल को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली
एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे राजेंद्र पवार ने राज्य सरकार के डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि रत्न अवॉर्ड को लेने से इनकार कर दिया है। यह अवॉर्ड राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों  बांटा गया। नाशिक में पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। राजेंद्र पवार ने कहा कि कोश्यारी ने छत्रपति शिवाजी महाराज और ज्योतिबा फुले को लेकर आपत्तिजनक बयान दिए थे इसलिए उनके हाथों से वह पुरस्कार नहीं लेना चाहते थे।

राजेंद्र पवार ने कहा, राज्यपाल के हाथों से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। मैं इस अवॉर्ड राज्यपाल के हाथों से नहीं बल्कि कृषि विभाग के दफ्तर से लेना पसंद करूंगा। राज्यपाल इस तरह के व्यक्ति हैं जिन्होंने बिना जाने समझे छत्रपति शिवाजी महाराज  और ज्योतिबा फुले को लेकर बयान दिया। उन्होंने राज्य की शांति भंग की। बता दें कि यह अवॉर्ड राज्य के कृषि विभाग द्वारा इस क्षेत्र में उम्दा काम करने वाले लोगों को दिया जाता है। राजेंद्र पवार का नाम साल 2019 में ही पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था लेकिन तब से कोविड 19 की वजह से समारोह नहीं हो पाया। राजेंद्र शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब पवार के बेटे हैं। रोहित राजेंद्र पवार के बेट हैं। वह इस समय करजात जमखेड़ विधानसभा से विधायक हैं।  

फरवरी में राज्यपाल ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर कहा था कि अगर उनके गुरु न होते तो वह कुछ न कर पाते। उन्होंने कहा था, बिना समर्थ गुरु रामदास के शिवाजी महाराज को कौन जानता। वह जीवन में शिक्षक की अहमियत के बारे में बता रहे थे। वहीं मार्च में कोश्यारी एक नए विवाद में फंस गए। उनका एक वीडियो वायरल हो गया था जिसमें वह बाल विवाह पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, सावित्रीबाई का विवाह 10 साल की उम्र में हो गया था और उनके पति उस वक्त 13 साल के थे। उस वक्त शादी के बाद आखिर लड़का और लड़की क्या सोचते रहे होंगे।

 

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