संतों की बात मानी सरकार ने, दो पहाड़ियों में खनन बंद कर वनक्षेत्र घोषित किया जाएगा

जयपुर
राजस्थान मे भरतपुर जिले के पसोपा गांव में संत विजय दास के पेट्रोल डालकर खुद को आग लगाने और 80 फीसदी झुलसने के बाद हरकत में आई राज्य सरकार ने संतों की सभी मांगें मान ली है।सरकार द्वारा मांग मानने के बाद संतों ने पिछले एक साल से चल रहा धरना समाप्त कर दिया है। दरअसल, साधु-संत पसोपा गांव और आसपास की कनकांचल एवं आदिबद्री पहाड़िों में हो रहे खनन को बंद करने की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। सरकार ने जब उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो संत विजय दास ने बुधवार को खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। गंभीर स्थित में उनका जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उपचार चल रहा है।

वहीं 30 घंटे तक मोबाइल के टावर पर बैठे रहे संत विजयदास भी सरकार से मिले आश्वासन के बाद नीचे उतर गए। धरना स्थल पर पहुंचे पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि कनकांचल एवं आदिबद्री पहाड़ियों को 15 दिन में वन क्षेत्र घोषित करने के साथ ही दो महीने में इस क्षेत्र में चल रही सभी लीजधारी खानों को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दोनों पहाड़ियों को धार्मिक स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा। मंत्री के आश्वासन के बाद करीब 800 हेक्टेयर के पहाड़ी इलाके को वन क्षेत्र घोषित किया जाएगा । मान मंदिर सेवा संस्थान,बरसाना के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने धरना खत्म करने की बुधवार देर शाम घोषणा की ।

उल्लेखनीय है कि साधु-संत दोनों पहाड़ियों में अवैध खनन होने की बात कह रहे थे । वहीं खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने कहा था कि जो लोग खनन कर रहे हैं उन्हे सरकार ने लीज दी हुई है। अब इन लीजों को दूसरी पहाड़ियों में स्थानांतरित किया जाएगा।  उल्लेखनीय है कि विजय दास लंबे समय से आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बुधवार को आंदोलन स्थल पर वे अपने साथ पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचे थे। उन्होंने अचानक खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली । वे बरसाना के निवासी हैं। एक साधु नारायण दास मंगलवार से मोबाइल टावर पर बैठे हैं। उन्हे नीचे उतारने को लेकर प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी समझाइश में जुटे हैं। लेकिन नारायण दास ने अवैण खनन, पेड़ों की अवैध कटाई बंद होने तक नीचे उतरने से इनकार कर दिया था । साधु-संत और स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक साल से धरना दे रहे हैं।

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