भुईंहर मुंडा कौन हैं, मोदी सरकार से क्यों मांग रहे अनुसूचित जनजाति का दर्जा

रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं झारखंड सरकार समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा को पत्र लिखकर भुईंहर मुंडा समुदाय को अनुसूचित जनजाति में अधिसूचित करने की मांग की है। बंधु तिर्की ने पत्र में गुमला, लातेहार, पलामू तथा गढ़वा जिले के भुईंहर/भुईंहर मुंडा समुदाय को अनुसूचित जनजाति में अधिसूचित करने की बात कही है।

जनजातीय कल्याण शोध संस्थान का दिया हवाला
उन्होंने इसके साथ ही पत्र में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के पत्रांक-6846, दिनांक-29.12.2020 के आलोक में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान द्वारा दिए गए पत्रांक-237, दिनांक- 25.08.2021 के प्रतिवेदन का उल्लेख किया है।

अभी अत्यंत पिछड़ी जाति का मिलता प्रमाणपत्र
ज्ञात हो कि संस्थान के निदेशक डा. रणेन्द्र कुमार के द्वारा स्पष्ट लघु प्रतिवेदन कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार के अवर सचिव राज महेश्वरम को अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु भेजा जा चुका है तथा उनके द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार को अंतिम कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है। इसके बावजूद इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। बंधु तिर्की ने लिखा है कि यह गंभीर चिंतन का विषय है कि भुईंहर/भुईंहर मुंडा समुदाय को झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से ही अंचल कार्यालयों से अत्यंत पिछड़ी जाति का जाति प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता है, जबकि अविभाजित बिहार में अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता था।

मुंडा जनजाति की उपजाति है भुईंहर मुंडा समुदाय
शेड्यूल कास्ट एवं शेड्यूल ट्राइब मॉडिफिकेशन लिस्ट 1956 के तहत् जाति ‘मुंडा’ अनुसूचित जनजाति में अधिसूचित है और भुईंहर/भुईंहर मुंडा उसी की उपजाति (शाखा) के रूप में अपनी स्थायित्व कायम रखती है। बंधु तिर्की ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा से अनुरोध किया है कि भुईंहर/भुईंहर मुंडा समुदाय को ‘मुंडा’ जनजाति में अधिसूचित कराने एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को उन्हें अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र निर्गत कराने हेतु आवश्यक कदम उठाएं।

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