गुलाम नबी आजाद को क्यों मिली आतंकवादियों से धमकी, पीएम मोदी का जिक्र या आर्टिकल 370 है वजह?

 नई दिल्ली
कांग्रेस से अलग होकर गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर में नई सियासी पारी की शुरुआत करने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच खबरें हैं कि उन्हें आतंकवादियों की तरफ से धमकियां मिल रही हैं। हालांकि, इसका कारण तो साफ नहीं है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इसके सियासी कारण हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि आजाद पर 'राजनीति का गिरगिट' होने के आरोप लग रहे हैं।

किससे मिली धमकियां और आजाद का क्या कहना है
खबर है कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिसटेंस फोर्स की तरफ से आजाद को धमकी मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस संबंध में कुछ पोस्टर भी शेयर किए गए हैं, जिनमें कहा गया, 'गद्दार के दिल में कोई वफादारी नहीं होती, केवल भरोसेमंद नजर आने का झूठा नाटक होता है।' साथ ही कहा जा रहा है कि आजाद ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की थी। हालांकि, पूर्व कांग्रेस नेता ने NSA से मुलाकात की बात से इनकार किया है और कहा कि वह जीवन में कभी उनसे नहीं मिले।
 
बार-बार पीएम और आर्टिकल 370 का जिक्र
जम्मू और कश्मीर में नई पार्टी की शुरुआत करने जा रहे आजाद ने रैलियों का दौर शुरू कर दिया है। इस दौरान उनके भाषणों में लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आर्टिकल 370 का जिक्र हो रहा है। वह लगातार कह रहे हैं कि फिलहाल आर्टिकल 370 की वापसी संभव नहीं है। रविवार को घाटी में रैली के दौरान उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा, 'वे (आलोचक) कहते हैं कि आप आर्टिकल 370 पर ज्यादा बात नहीं करते हैं। गुलाम नबी आजाद वोट के लिए लोगों को गुमराह नहीं करेगा। मैं उनसे कहूंगा कि ऐसी बात न करें, जो मेरे या उनके हाथ में नहीं है।'

उन्होंने आगे कहा, 'अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए आपके पास संसद में दो-तिहाई बहुमत होना चाहिए। संसद में इसका मतलब 550 में से 350 सीटों के आसपास है… मुझे नहीं लगता कि मेरे जीवन में कांग्रेस 350-360 सीटें जीत पाएगी… अब मुझे बताएं कि कौन झूठ बोल रहा है। वे या मैं।' बुधवार को भी उन्होंने कहा कि संसद के बाद एक और रास्ता सुप्रीम कोर्ट का है, लेकिन शीर्ष न्यायालय ने बीते तीन सालों में आर्टिकल 370 से जुड़ी एक भी फाइल नहीं खोली है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली जल्दी संभव नहीं है। आजाद ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वह झूठ बोलना और राज्य के लोगों की भावनाओं के साथ खेलना बंद कर दें। हालांकि, आजाद ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने कभी भी आर्टिकल 370 की बहाली की संभावनाओं से इनकार नहीं किया।

बुधवार को ही जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा अनुच्छेद 370 ला सकत हैं, लेकिन वह उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं मना सकते। उन्होंने कहा था, 'मैंने कभी नहीं कहा कि आर्टिकल 370 वापस नहीं आ सकता। पीएम मोदी ने जैसे कृषि कानून वापस लिए थे, वह आर्टिकल 370 ला सकते हैं। कृषि कानून विपक्ष नहीं, बल्कि पीएम मोदी की तरफ से वापस लिए गए थे, जिनकी पार्टी की संसद में बहुमत है।'

 

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