Monday, August 3rd, 2020
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मेडापार के दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा पूरे घटनाक्रम पर है नजर-कलेक्ट

बिलासपुर
मेडापार पंचयात भवन में हुई पशुओं की सामूहिक मौत को कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर ने गंभीरता से लेते हुए कहा है पहले इसका बात का पता लगाया जायेगा किइसके लिये दोषी कौन हे दोषियों को कतई बख्शा नहीं जायेगा। इसी के साथ उन्होंने पशु मालिकों को मुआवजा दिये जाने की बातें भी कही।

डॉ.सारांश मित्तर ने कहा कि मेड़पार में गायों की मौत के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा। य़ह जानते हुए भी कि गायों को छेककर घरों में रखा जाना है। बावजूद इसके बिना किसी सूचना और सरपंच ने मनमानी करते हुए गायों को जबरदस्ती घर से लाकर जर्जर भवन में रखा। यह अक्षम्य अपराध है। पता लगाया जा रहा है कि इस घटना के पीछे सरपंच के साथ सचिव की क्या भूमिका है। यदि दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई होगी। जबकि सचिव और सरपंच समेत सभी को मालूम है कि म़ेड़पार स्थित जर्जर भवन को गौठान बनाया ही नहीं जा सकता है। और ना ही बनाने का आदेश ही दिया गया है। बावजूद इसके घरों से जबरदस्ती गायों को एक दिन पहले लाकर जर्जर भवन में रखा गया। हम पता लगा लेंगे कि इसके लिए जमीनी स्तर पर जिम्मेदार कौन है।

उन्होने कहा कि इस पूरे मामले में रोका छेका का कोई सवाल ही नहीं है। क्योंकि जर्जर भवन में रखी गयी सभी गायों को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लाया गया है। जबकि कल से पहले तक जर्जर भवन का उपयोग भी नहीं था। जाहिर सी बात है कि सरपंच ने मनमानी करते हुए गायों को जर्जर भवन में रखा। इसके पीछे उसके मंसूबों को पता लगाएंगे। जबकि गांव में गौठान जैसी कोई निर्माण भी नहीं है। मतलब यहां लोगों को अपने मवेशियों को घर पर ही रोककर रखा जाना है। बावजूद इसके सरपंच ने लोगों के घरों से मवेशियों को एकत्रित कर जर्जर भवन में रखा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस बात की जानकारी गांव पंचायत सचिव को भी नहीं है। बावजूद इसके बिना किसी को जानकारी दिए शुक्रवार की शाम सरपंच ने सभी के घरों से मवेशियों को एकत्रित कर जर्जर भवन में रखा। जानते हुए भी कि यहां गाय सुरक्षित नहीं है। सबको मालूम है कि जहां गौठान नहीं है..वहां रोका छेका का मतलब लोग अपनी गायों को छेककर घर में ही रखें। गोबर को निर्धारित स्थान में जाकर विक्रय करें। मतलब गायों को लावारिस छोडऩे की वजाय घर पर ही रखना है। साथ ही गोबर के माध्यम से कमाई भी करना है।

शासन के निदेशार्नुसार लावारिस मवेशियों को ही गौठान में सरपंच और सचिव समेत अन्य लोगों के सहयोग रोका छेका करना है। निजी मवेशियों को नहीं। फिर मेड़पार में जजज्र भवन में गौठान का सवाल ही नहीं है। जानकारी मिल रही है कि सरपंच ने गांव के सभी घरों से गायों को इकठ्ठा कर जर्जर भवन में रखा। निश्चित रूप से अपराध है। लेकिन उसने ऐसा किया यह जांच का विषय है। अधिकारी मौके पर हैं और एक एक गतिविधियों पर नजर है। किसी को नही बख्शा जाएगा। जर्जर भवन में गौठान का होने का सवाल ही नहीं उठता है। यहां सरपंच और सचिव की लापरवाही सामने आ रही है। बावजूद इसके बिना किसी सूचना के एक दिन पहले जजज्र भवन को सरपंच ने अस्थायी गौठान बना दिया। निश्चित रूप से स्थानीय स्तर पर बड़ी लापरवाही है।

Source : Agency

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