Friday, October 23rd, 2020
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अगले चुनावों पर अकाली की नजर, किसानों के साथ दिखने के लिए हरसिमरत का इस्तीफा बन गई थी मजबूरी?

नई दिल्ली

किसान से जुड़े बिलों को लेकर विरोध झेल रही मोदी सरकार को गुरुवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके सहयोगी अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने सरकार से इस्तीफा दे दिया। अकाली दल के कोटे से आने वाली हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफे की पेशकश करते हुए कहा कि मैंने किसान विरोध अध्यादेश व कानूनों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। हरसिमरत के इस्तीफे को अकाली दल की मजबूरी से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि किसानों से जुड़े बिलों के विरोध के चलते आने वाले चुनावों में किसानों का वोटबैंक सीधे कांग्रेस के खाते में जा सकता था।दरअसल, पंजाब में अकाली का राजनीतिक प्रभाव बीजेपी से ज्यादा है, ऐसे में वह पॉलिटिकल माइलेज जरूर लेना चाहेगी। चर्चा इस बात की है कि इस्तीफे का फैसला अकाली और बीजेपी की सहमति से लिया गया हो जिससे अगले चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा लेने से रोका जा सके। इस बात को बल इसलिए मिल रहा है क्योंकि अकाली ने मंत्री का इस्तीफा तो दिलवा दिया लेकिन अब भी पार्टी एनडीए के साथ बनी हुई है।इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में किसान बिलों पर चर्चा के दौरान अकाली दल के अध्यक्ष व लोकसभा सांसद सुखबीर सिंह बादल ने मोदी सरकार द्वारा भारी विरोध के बीच किसान बिलों को संसद में आगे बढ़ाने के अड़ियल रुख पर कड़ी चेतावनी देते हुए ऐलान कर दिया कि उनकी पार्टी की सदस्य हरसिमरत कौर किसान मुद्दों को लेकर मोदी सरकार से इस्तीफा दे देंगी। अकाली ने मोदी सरकार से बाहर आने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन एनडीए से बाहर निकलने का फैसला पार्टी ने नहीं लिया है। किसान बिलों को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों को छोड़कर लगभग सभी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इनमें बीजेडी व टीआरएस जैसे दल भी हैं।

 

किसानों के तेवर देख लिया अकाली दल ने ये फैसला

बता दें कि किसान से जुड़े तीन अध्यादेशों पर आधारित बिलों को लेकर देशभर में किसान विरोध कर रहा है। खासकर पंजाब व हरियाणा में किसान सड़कों पर उतरा है। ऐसे में कृषि आधारित पंजाब जैसे राज्य से आने वाले अकाली दल के लिए किसानों के उग्र तेवरों को देखते हुए बिल पर सरकार के साथ खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर अकाली दल लगातार अपना विरोध जाहिर कर रहा है। सरकार से लेकर पार्टी स्तर पर उसने इस मसले पर बात करने की कोशिश की। लेकिन जब हल नहीं निकला तो उसे कड़ा रुख लेना पड़ा।

 

सरकार के खिलाफ अकाली दल ने किया था वोट

इससे पहले मंगलवार को इससे जुड़ा बिल आवश्यक वस्तु संशोधन बिल पास होने के दौरान अकाली दल ने बिल के खिलाफ वोट किया था। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि शुरू में अकाली दल मोदी सरकार के साथ था, लेकिन जब उसने इन मुद्दे को लेकर किसानों की उग्र भावनाओं की तीव्रता देखी तो उसने यूटर्न लेते हुए विरोधी तेवर अपनाए। हालांकि बादल ने सदन में सफाई देते हुए कहा कि अकाली दल ने कोई यू टर्न नहीं लिया, वह शुरू से ही इसका विरोध कर रहा है। अकाली दल की मांग है कि जब तक किसानों के सरोकारों का हल नहीं होता, तब तक बिलों को आगे न बढ़ाया जाए।

 

 

पंजाब में केन्द्र के साथ अकाली दल को भी घेर रही कांग्रेस

इस बिल को लेकर अकाली दल की मजबूरी उनके अपने राज्य के सियासी समीकरणों के साथ-साथ पंजाब की कृषि आधारित सामाजिक व सियासी व्यवस्था है। वहां अकाली का सामना सत्तारूढ़ कांग्रेस से है, जो इन बिलों का न सिर्फ कड़ा विरोध कर रही है, बल्कि मोदी सरकार के साथ खड़ा होने के लिए उसे भी निशाना बना रही है। पंजाब में किसान इतना आंदोलित हैं कि उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी सांसद इन बिलों के साथ होगा, उसे राज्य में घुसने नहीं दिया जाएगा। कृषि व किसानों की पहचान वाले पंजाब राज्य में किसान हितों के खिलाफ जाकर राजनीति करना मुश्किल है। वहां बीजेपी से ज्यादा सियासी स्टेक अकाली दल का है। अकाली दल की नजर 2022 में होने वाले पंजाब के चुनावों पर है। अकाली दल के लिए उसके अपने वजूद का सवाल है। ऐसे में वह केंद्र सरकार में रहकर अपना राजनैतिक वजूद दांव पर नही लगाना चाहेगी।

Source : Agency

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