Thursday, October 29th, 2020
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हाईकोर्ट का आदेश महामारी एक्ट के तहत पुलिस को एफआईआर का अधिकार नही

बिलासपुर
राजनांदगांव की महिला चिकित्सक ने माहामारी के दौरान पुलिस द्वारा उसके खिलाफ दायर एफआईआर को रद्द किये जाने के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जो याचिका दायर की थी उस पर उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि पुलिस को धारा 188 (महामारी एक्ट) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने जिला पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को शून्य कर दिया है।

उच्च न्यायालय कि जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। राजनांदगांव की डॉ. अपूर्वा घिया (25 वर्ष) मेडिकल ग्रेजुएट हैं जो लॉकडाउन के दौरान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली में थीं। याचिका में बताया गया कि ई पास लेकर 7 जून को दिल्ली से राजनांदगांव और अगले दिन अपने घर अम्बागढ़ चौकी पहुंची। वहां उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपना चेकअप कराया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अपने पहुंचने की जानकारी दी। वह इसकी जानकारी मुख्य नगर पंचायत अधिकारी (सीएमओ) को नहीं दे पाई।

सीएमओ की शिकायत पर अम्बागढ़ चौकी थाने में उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 188 के तहत 16 जून को अपराध दर्ज कर लिया गया। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर कोर्ट से एफआईआर रद्द करने की मांग की कि किसी भी लोक सेवक को एफआईआर दर्ज कराने या करने का अधिकार नहीं है। जिला दंडाधिकारी द्वारा इस तरह का कोई प्रचार भी नहीं किया गया था यात्रा से आने के बाद किन किन लोगों को सूचना देनी है। मुख्य नगर पंचायत अधिकारी कलेक्टर के अधीन कार्य करने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें स्वयं अपराध दर्ज कराने का अधिकार नहीं है। दिल्ली से लौटने के बाद उसने स्वयं को मेडिकल जांच के लिये प्रस्तुत किया था जो प्रशासन को सूचित करने का पर्याप्त आधार है।

कोरोना वयारस से लडऩे के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी कानून के तहत लागू किया गया है। इसी कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर लॉकडाउन में सरकार द्वारा दिए गए निदेर्शों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 1897 के महामारी कानून के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार/कानून के निदेर्शों/नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है। इस संबंध में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निदेर्शों का उल्लंघन करने पर भी आपके खिलाफ ये धारा लगाई जा सकती है। अगर आपको सरकार द्वारा जारी उन निदेर्शों की जानकारी है, फिर भी आप उनका उल्लंघन कर रहे हैं, तो भी आपके ऊपर धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

Source : Agency

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