Friday, October 23rd, 2020
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तीन तलाक : दिल्ली हाईकोर्ट ने पति को सजा देने का प्रावधान रद्द करने की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली
पत्नी को तीन तलाक ((Triple Talaq)) देने पर पति को दंडित करने वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करके खत्म करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि तीन तलाक को पहले ही अमान्य कर दिया गया है, ऐसे में इस तरह के कृत्य के लिए सजा देने संबंधी कानून का प्रावधान दुखद और अतार्किक है। जस्टिस ‌विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने सरकार को 8 सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। हालांकि, बेंच ने याचिकाकर्ता की उस मांग पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसमें यह याचिका लंबित रहने तक राजधानी में तीन तलाक देने के आरोप में दर्ज सभी मामलों की जांच और सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

याचिका में मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों के संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के तहत दिल्ली में दर्ज सभी मुकदमों की जांच और सुनवाई पर यह याचिका के लंबित रहने तक रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कानून की धारा-4 का उद्देश्य सालों पुरानी परंपरा को हतोत्साहित करना है, जिसके तहत अपनी पत्नी को तीन तलाक कहकर रिश्ता तोड़ने वाले पति को तीन साल तक की कैद की सजा और जुर्माने की सजा देने का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक कानून को किसी सक्षम अदालत द्वारा अवैध या असंवैधानिक घोषित नहीं किया जाता या निष्प्रभावी नहीं किया जाता, तब तक कानून को वैध माना जाता है। बेंच ने कहा है कि पहली नजर में धारा 4 का उद्देश्य इस तरह के चलन की रोकथाम का लगता है। हाईकोर्ट ने कहा है कि तीन तलाक को गैर कानूनी घोषित किया गया है, इसका मतलब यह नहीं निकलता कि सरकार इस तरह के चलन को जारी रखने को अपराध नहीं बना सकती। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने कानून के तहत तीन तलाक देने पर पति को सजा देने के प्रावधान को असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और उनके जैसे मुस्लिम पुरुषों के मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की है। याचिकाकर्ता की पत्नी ने उक्त प्रावधान के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें इस मामले में सुनवाई के लिए पूर्ण पीठ (तीन या इससे अधिक जजों की) बनाने की मांग की थी।   
 

Source : Agency

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