Thursday, October 29th, 2020
Close X

एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल के साथ चीनी बॉम्बर

पेइचिंग
चीन ने अपने परमाणु बॉम्बर एच-6एन पर एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल को तैनात कर दिया है। 2017 से ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पास ऐसी रिपोर्ट थी कि चीन दो तरह के एयर लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल को बना रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन की यह मिसाइल उसके एच-6 बॉम्बर के साथ दिखाई दी है। इस तरह की टेक्नोलॉजी दुनिया के बहुत कम देशों के पास ही है। ऐसे में भारतीय और अमेरिकी नौसेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

समुद्र में अमेरिका की बढ़ेगी मुश्किलें
अमेरिका और चीन में कई मुद्दों को लेकर विवाद चरम पर है। आए दिन अमेरिकी नेवी के युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर चीन के नजदीक पहुंचते हैं। ऐसे में चीन की इस मिसाइल से अमेरिकी नेवी को खतरा हो सकता है। ऐसे मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह दुश्मन को रिएक्ट करने के लिए सबसे कम समय देते हैं। जबकि बैलिस्टिक मिसाइल के लैंड और सी वैरियंट को लॉन्च करते ही दुश्मन को सूचना मिल जाती है।

मिसाइल को लेकर रक्षा जानकारों की बंटी हुई राय
अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने 2019 में इस मिसाइल को CH-AS-X-13 का नाम दिया था। चीन पर नजर रखने वाले कई रक्षा विशेषज्ञ इसे चीन की DF-21D मिसाइल बताते हैं। जबकि, देखने में यह मिसाइल चीन के DF-17 जैसी लगती है क्योंकि इसके भी आगे का हिस्सा हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) जैसे दिखाई देता है। चीन के तरफ से कभी भी इस मिसाइल को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

कितनी ताकतवर है यह मिसाइल
यह दो स्टेज सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मिसाइल है। जिसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 3000 किलोमीटर है। दावा यह भी किया जाता है कि यह मिसाइल अपने साथ पहमाणु वॉरहेड को भी लेकर जाने में सक्षम है। इस मिसाइल को डीएफ-21डी का एयर लॉन्च वैरियंट भी कहा जाता है। डीएफ-21डी मिसाइल 30 फीट से ज्यादा लंबी है जो 2000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसलिए इस मिसाइल को जमीन से ही लॉन्च किया जा सकता है।

भारत के पास भी यह तकनीकी नहीं
भारत के पास भी हवा से एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल को लॉन्च करने की तकनीकी नहीं है। हालांकि, ऐसी मिसाइल को बनाने के लिए डीआरडीओ काम कर रहा है। जिसे हवा से ही लॉन्च किया जा सके। अभी तक भारत अपने सुखोई-30 एमकेआई से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को दागने की तकनीकी ही हासिल कर पाया है। क्योंकि, बैलिस्टिक मिसाइल क्रूज की तुलना में भारी और लंबी होती हैं। ऐसे में उन्हें लॉन्च करने के लिए भी कोई लंबा प्लेन चाहिए।

Source : Agency

आपकी राय

3 + 6 =

पाठको की राय