Monday, August 2nd, 2021
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बुढ़ापे से मुक्ति दिलाता है उषा पान...


काकचण्डीश्वर कल्पतन्त्र नामक आयुर्वेदीय ग्रन्थ में रात के पहले प्रहर में पानी पीना विषतुल्य बताया गया है। मध्य रात्रि में पिया गया पानी दूध के सामान लाभप्रद बताया गया हैं। प्रात:काल यानी सूर्योदय से पहले पिया गया जल मां के दूध के समान लाभप्रद कहा गया है। यह इतना लाभप्रद है कि रोग और बुढ़ापे से मुक्ति दिला सकता है। लोहे के बर्तन में रखा हुआ दूध और तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने वाले को कभी लिवर और रक्त संबंधी रोग नहीं होते और रक्त हमेशा शुद्ध बना रहता है। उषा पान के लिए पिया जाने वाला जल तांबे के बर्तन में रात भर रखा जाए, तो उससे और भी स्वस्थ्य लाभ प्राप्त हो सकेंगे। जल से भरा तांबे का बर्तन सीधे भूमि के संपर्क में नहीं रखना चाहिए, अपितु इसको लकड़ी के टुकड़े पर रखना चाहिए। और पानी हमेशा नीचे उकडू बैठकर यानी घुटनों के बल उत्कर आसान में बैठकर पीना चाहिए। ऐसे लोग जिन्हें यूरिक एसिड बढ़े होने की शिकायत है उनके लिए तो सुबह उषा पान करना किसी रामबाण औषिधि से कम नहीं है।

क्या है उषा पान
प्रात: काल यानी रात्रि के अंतिम प्रहार में पिया जाने वाल जल, दूध इत्यादि को आयुर्वेद और भारतीय धर्म शास्त्रों में उषा पान शब्द से संबोधित किया गया है। सुप्रसिद्ध आयुर्वेदीय ग्रन्थ 'योग रत्नाकरÓ सूर्य उदय होने के निकट समय में जो मनुष्य आठ प्रसर मात्रा में जल पीता हैं, वह रोग और बुढ़ापे से मुक्त होकर सौ वर्ष से भी अधिक जीवित रहता है।

कब करें उषा पान
प्रात:काल बिस्तर से उठ कर बिना मुख प्रक्षालन यानी कुल्ला इत्यादि बिना किए हुए ही पानी पीना चाहिए। कुल्ला करने के बाद पिए जाने वाले पानी से सम्पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। ध्यान रहे पानी मल मूत्र त्याग के भी पहले पीना है।

उषा पान के फायदे
सवेरे तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से अर्श यानी बवासीर, शोथ(सोजिश), ग्रहणी, ज्वर, पेट के रोग, बुढ़ापा, कोष्ठगत रोग, मोटापा, मूत्राघात, रक्त पित्त यानी शरीर के किसी भी मार्ग में होने वाला रक्त स्त्राव, त्वचा के रोग, कान नाक गले सिर एवं नेत्र रोग, कमर दर्द तथा अन्यान्य वायु, पित्त, रक्त और कफ, मासिक धर्म, कैंसर, आंखों की बीमारी, डायरियां, पेशाब संबंधी बीमारी, किडऩी, टीबी, गठिया, सिरदर्द आदि से संबंधित अनेक व्याधियां धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं।

जल की नैसर्गिक शक्ति
जल में एक नैसर्गिक विद्युत होती है, जो रोगों का विनाश करने में समर्थ होती हैं। इसलिए जल के विविध प्रयोगों से शरीर के सूक्षम अति सूक्षम, ज्ञान तंतुओ के चक्र पर अनूठा प्रभाव पड़ता है, जिस से शरीर के मूल भाग मस्तिष्क की शक्ति और क्रियाशीलता में चमत्कारिक बढ़ोतरी होती है। एक कहावत हैं-प्रात: काल खाट से उठकर, पिए तुरतहि पानी। उस घर वैद्य कबहुं नहीं आए बात घाघ ने जानी।

Source : Agency

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