Friday, October 22nd, 2021
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सेहत के लिए फायदेमंद हैं ये चाय


कमेलिया सिनेंसिस एक सदाबहार झाड़ीनुमा छोटा पौधा है, जिसकी पत्तियों और कलियों का इस्तेमाल खास तरह की चाय बनाने में किया जाता है। वैसे कमीलया थीएसीआई प्लांट का ही जीनस है, जिसे आमतौर पर टी प्लांट, टी शर्ब (झाड़ी) और टी ट्री भी कहा जाता है। इसकी दो प्रमुख किस्में हैं, एक कमेलिया सिनेंसिस की चाइनीस टी और दूसरी कमेलिया, भारत के असम की अस्समिका टी।

सफेद, पीली, हरी, उलोंग, पुऐर और काली चाय सभी इसी पौधे द्वारा प्राप्त की जाती है लेकिन पत्तियों की कटाई की प्रक्रिया और इसे बनाने की विधि सबकी अलग-अलग है। हर एक चाय को ऑक्सीकरण के स्तर पर अलग- अलग ढंग से प्राप्त किया जाता है। कमेलिया चाय के गुण इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसकी पत्तियों को कब और कैसे काटा जा रहा है। कुकिचा टी भी कमीलया पौधे से ही बनाई जाती है, इसे बोचा भी कहते हैं। इस चाय की खास बात यह है कि यह पत्तियों से नहीं बल्कि पौधे के तने और टहनियों से तैयार की जाती है। कमेलिया से बनी हर एक चाय को अपने ही औषधीय और रासायनिक गुण है, जिसे गर्म और ठंडे, दोनों रूप में पिया जाता है।

ग्रीन टी
 ग्रीन टी यानि हरी चाय, कमेलिया सिनेंसिस पौधे की पत्तियों से ही बनाई जाती है। पहले तो चीन के लोग इसका ज्यादा सेवन करते थे लेकिन अब तो हर जगह इसका सेवन आम हो गया है। आज ग्रीन टी को सेहत के सुपरस्टार के रूप में जाना जाता है। कमेलिया की युवा हरी पत्तियों को काटकर उबाला जाता, फिर सुखाया और पिसा जाता है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होती है। ग्रीन टी के सेवन से ब्रेन सिस्टम और इम्यून सिस्टम भी दुरुस्त रहता हैं साथ ही शरीर फुर्तीला बनता हैं।

फायदे
इसका नियमित सेवन करने से सिर्फ रोगों से ही छुटकारा नहीं मिलता बल्कि इससे हमारी प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
 इसका रोजाना सेवन मोटापा कम करने में मदद करता है। इससे शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ता है और डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी परेशानियां खत्म होती है।
ग्रीन टी में मौजूद एंटीआक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से स्किन की रक्षा करते हैं। चेहरे पर झुर्रियां कम और फेस ग्लोइंग होता है। इसमें मौजूद कैमिकल स्ट्रैस कम करने में सहायक है।
ग्रीन टी कैंसर के विषाणुओं को मारती है। शोधों की बात करें तो ग्रीन टी पीने वाले लोगों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 25 प्रतिशत कम होता है। इससे त्वचा के कैंसर की संभावना भी कम होती है।
इससे कॉलेस्ट्रोल सही और हाई ब्लड प्रैशर को रोकने में मदद करती है।
ग्रीन टी के सेवन से अल्जेरिया जैसी बीमारियां ठीक होती है। यह ब्रेन सेल्स को बचाती हैं और डैमेज सेल्स को रिकवर भी करती हैं।

कमेलिया ब्लैक टी के फायदे
 रंग गहरा होने की वजह से इसे ब्लैक टी कहा जाता है लेकिन अगर आप इसे गौर से देखें तो यह गहरे सिंदूरी रंग में दिखेगी। इसलिए इसे कई जगहों पर रैड टी भी कहा जाता है। कमेलिया सिनेंसिस की झाड़ी से मिलने वाली यह  चाय, ग्रीन व्हाइट और उलोंग टी की पत्तियों से ज्यादा ऑक्सीकृत होती हैं। इसका स्वाद बाकियों के मुकाबले ज्यादा कड़क होता है।ब्लैक चाय में मसाले, लौंग, इलायची और अदरक का मिश्रण तैयार करके भी बनाया जाता है।

फायदे
ब्लैक टी का स्वाद अधिक समय तक बरकरार रहता है। यह दिल की बीमारियों, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, जैसे समस्याओं से बचाए रखने में मदद करती है।
दिमागी फुर्ती, प्रतिरक्षा प्रणाली, हड्डियों की मजबूती, वजन को कंट्रोल और एनर्जी को बनाए रखने में भी सहायक होती हैं।
ब्लैक टी शरीर में तनाव हार्मोन के स्तर को कम करने में सहायक होती है।
ब्लैक टी में कैटचिन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो मुंह के कैंसर के खतरे को कम करता है। ब्लैक टी में फ्लोराइड्स होते हैं जो सांसों की दुर्गंध के साथ कैविटी से हानिकारक बैक्टीरिया को भी बाहर निकालते हैं।

कमेलिया व्हाइट टी
 व्हाइट टी बनाने के लिए कमैलिया सिनेंसिस पौधे की यंगेस्ट कलियों और पत्तियों को खिलने से पहले ही बसंत ऋ तु में ही काट लिया जाता है। यह आक्सीकृत नहीं होती है। व्हाइट टी में कैफीन की मात्रा पत्तियों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। फ्लेवर की बात करें तो यह बाकी चायों के मुकाबले मीठी होती है।

फायदे
चीन के लोग कई सालों से लंबी उम्र और स्वस्थ रहने के लिए व्हाइट टी पीते आ रहे हैं। यह कई बीमारियों से सुरक्षित रखती है।
वाइट टी, ब्लैक और ग्री टी से कहीं ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। कैंसर से लडऩे की क्षमता, एमिनो एसिड, अधिक जीवाणुरोधी क्षमता, तनाव से राहत पहुंचाने में फायदेमंद साबित होती है।
यह ब्लड सर्कुलैशन को सही रखने और दिल को सेहतमंद रखने में फायदेमंद है।
दांतों के बैक्टीरिया से लडऩे में मददगार साबित होती है।

ऊलांग टी
ऊलांग टी काफी हद तक ब्लैक टी की तरह ही होती है लेकिन इसमें चाय की पत्तियों को मशीन में ज्यादा देर तक सुखाया जाता है। फर्मेट होने की वजह से इसका स्वाद कड़क होता है। ब्लैक टी के मुकाबले इसमें अधिक मात्रा में टैनिन होता है। तुरंत चुस्ती और एनर्जी पाने के लिए इसका सेवन कारगार माना जाता है।

फायदे
ऊलांग टी स्किन की एलर्जी को दूर करने में मददगार है। रोजाना 3 कप ऊलांग टीन पीने से एग्जिमा से निजात पाई जा सकती है। त्वचा की समस्याओं, जलन और सूजन और स्किन इरीटेशन से राहत दिलाता है।

पुऐर टी
कमेलिया सिनेंसिस पौधे की पत्तियों और तने से ही तैयार की जाने वाली पुऐर टी रैड ब्राऊन कलर की होती है। ब्लैक और ऊलांग टी की तरह पुऐर टी की पत्तियों भी फर्मेन्टेड होती है।

फायदे
यह ब्रेन और हार्ट के लिए फायदेमंद होती है।
फैट बर्न कर वजन को कंट्रोल में रखती है।

यैलो टी
यैलो यानी पीली चाय बहुत ही महंगी और दुर्लभ चाय है। इसे बनाने का तरीका भी यूनिक है। इसे डैम्प कपड़े में भाप (बहुत कम समय के लिए) दी जाती है। आक्सीडेशन के बाद पत्तियों का रंग पीला हो जाता है। इसे उच्च गुणवता वाली चाय में शामिल किया गया है।

फायदे
कैलेस्ट्रोल कम करने में सहायक
ब्लड कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर से रोकथाम
डायबिटीज और लिवर से जुड़ी समस्या में मददगार

ध्यान में रहें
भले ही इन चायों में औषधि गुण भरपूर मात्रा में हैं लेकिन फिर भी इनका सेवन करने से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।

Source : Agency

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