केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को दी मंजूरी,6 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

इस मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने का है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य रखा है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है.

नईदिल्ली

मोदी सरकार ने पर्यावरण और ऊर्जा जरुरतों को ध्यान में रखते हुए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भारत जल्द ही ग्रीन हाइड्रोजन के लिए ग्लोबल हब के रुप में विख्यात होगा। इस मिशन के तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 19,744 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें उत्पादकों को कई तरह के इंसेंटिव्स दिये जाएंगे। केन्द्रीय मंत्री ने दावा किया कि यह मिशन 6,00,000 लोगों को रोजगार देगा और इससे सालाना ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में 50 मिलियन मीट्रिक टन की कमी आएगी।

19,744 करोड़ रुपए की मिली मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आगे यह भी बताया कि इस मिशन में स्वीकृत कुल राशि में से 8 लाख करोड़ रुपए का सीधा निवेश होगा। इस निवेश से ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में इसमें 6 लाख नौकरियों का सृजन होगा। साथ ही इससे 50 मिलियन टन ग्रीन हाउस उत्सर्जन को कम किया जा सकेगा।

जानिए इसकी खासियत

  • पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से ग्रीन हाइड्रोजन पर चर्चा की और नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की थी।
  • इसमें कुल 8 लाख करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट होगा और 6 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • इस लक्ष्य है प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना। इससे सालाना ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 50 मिलियन मीट्रिक टन की कमी आएगी।
  • देश में इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण को लेकर पांच साल के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। 60-100 गीगावाट की इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को तैयार किया जाएगा।
  • इलेक्ट्रोलाइजर की मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर 17,490 करोड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
  • ग्रीन हाइड्रोजन के हब को विकसित करने के लिए 400 करोड़ का प्रावधान किया है।
  • इसके अलावा कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश में 382 मेगावाट के सुन्नी बांध हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। इसमें 2614 करोड़ रुपए की लागत आएगी और ये सतलुज नदी पर बनेगा। इसके निर्माण के बाद हिमाचल को 13 पर्सेंट बिजली मुफ्त मिलेगी। इस योजना से 4000 लोगों को रोजगार मिलेगा और हजारों लोगो को फायदा होगा।
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