2019 चुनाव में प्रिया दत्त की जगह नगमा हो सकती हैं उत्तर-मध्य सीट का कांग्रेसी चेहरा

मुंबई
कांग्रेस ने पार्टी के दिग्गज नेता रहे दिवंगत सुनील की दत्त की बेटी प्रिया दत्त को पार्टी के सचिव पद से हटा दिया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस में प्रिया की निष्क्रियता से आलाकमान उनसे नाराज था। कहा जा रहा है कि मुंबई के उत्तर-मध्य सीट से 2019 में लोकसभा चुनाव में प्रिया की जगह अब अभिनेत्री नगमा को लड़ाया जा सकता है। नगमा उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान और कर्नाटक में कई रोड शो कर चुकी हैं। 
 

रविवार को सांताक्रूज में पार्टी की उत्तर मध्य जिले की मीटिंग के दौरान नगमा के शरीक होने से भी इस कयास को बल मिला है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि हालांकि प्रिया दत्त इस सीट से 'असली दावेदार' है, उन्हें अनौपचारिक रूप से हटाने का मतलब यही है कि शायद इस बार वह टॉप चॉइस नहीं होंगी। बता दें कि प्रिया दत्त 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में इस सीट से जीती थीं। वरिष्ठ नेता आगे कहते हैं कि हालांकि प्रिया दत्त की राजनीतिक विरासत और उनकी मजबूत छवि उन्हें अभी भी रेस में शामिल करती है। वह दिवगंत कांग्रेस नेता सुनील दत्त की बेटी हैं। 

उत्तर पश्चिमी सीट से भी लड़ सकती हैं नगमा 
एक अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता ने बताया कि नगमा को उत्तर पश्चिम सीट के लिए भी चुना जा सकता है। यह सीट दिवगंत नेता गुरुदास कामत की है। वह कहते हैं, 'नगमा उस सीट से 2009 में लड़ने वाली थीं लेकिन आखिरी समय पर उस सीट से कामतजी को टिकट दे दिया गया था। इसलिए अगर दत्त को दोबारा से उत्तर मध्य के लिए चुना जाता है तो नगमा को उत्तर पश्चिम की सीट दी जा सकती है।' 

नगमा जम्मू-कश्मीर और पुड्डुचेरी में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस (एआईएमसी) की सचिव भी हैं। हालांकि नगम इन कयासों को खारिज कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के कारण वह रविवार की मीटिंग शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा, 'एआईएमसी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों को उस निर्वाचन क्षेत्र की मीटिंग में शामिल होना था जहां वह रहते हैं। मैं मुंबई उत्तर मध्य में रहती हूं और यहीं से मैं वोट करती हूं।' 

प्रिया के समर्थकों ने जाहिर की नाराजगी 
अभिनेत्री ने नेता बनी नगमा कहती हैं कि पार्टी का हाइकमान ही तय करेगा कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगी। माना जाता है कि नगमा पार्टी हाइकमान के काफी करीब भी हैं। नगमा ने 2014 का चुनाव यूपी की मेरठ सीट से लड़ा था लेकिन हार गई थीं। इसके अलावा वह तमिलनाडु और बिहार में पार्टी की इनचार्ज भी रह चुकी हैं। 

उधर प्रिया दत्त को अचानक पद से हटाए जाने पर उनके समर्थकों ने नाराजगी जाहिर की। सोमवार को उन्होंने अपने समर्थकों को शांत करने का प्रयास किया और अपनी बर्खास्तगी को भी हल्का करने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, 'अगर कोई एक शख्स ही पद पर हमेशा के लिए बना रहेगा तो फिर दूसरे उम्मीदवार कहां जाएंगे।' प्रिया ने कहा कि इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है और नए लोगों को मौका मिलना चाहिए। 

राजनीतिक निष्क्रियता बर्खास्तगी की वजह? 
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, प्रिया को पद हटाने की सबसे बड़ी वजह उनकी राजनीतिक निष्क्रियता है। 2014 में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पार्टी में सचिव और मीडिया प्रभारी बनाया था, लेकिन प्रिया अपनी इस जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं कर पाईं। एक कांग्रेस नेता ने कहा कि वह पिछले महीने पार्टी द्वारा बुलाए भारत बंद के दौरान मुंबई से दूर थीं। 

कहा जाता है कि प्रिया दत्त पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी, विधायक नसीम खान और पूर्व राज्य मंत्री कृपांशकर से भी नहीं मिलती हैं। बता दें कि प्रिया दत्त ने पिछले साल यूपी चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद चिंता जाहिर की थी। तब उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ही कांग्रेस को बीमार कर रही है। जो शायद पार्टी के हाइकमान को नागवार गुजरा हो। 

'तैयारी के साथ दोबारा चुनाव लड़ूंगी' 
हालांकि प्रिया इन दावों को खारिज करती हैं। वह कहती हैं, 'मुझे पार्टी के सचिव पद से हटाए जाने का, भारत बंद में शामिल न होने से कोई लेना-देना नहीं है।' लंबे समय तक पार्टी से जुड़े रहने की ओर इशारा करके उन्होंने कहा, 'बदलाव अच्छा है। मैं दोबारा चुनाव में लडूंगी जिसके लिए मैं तैयारियां शुरू कर रही हूं।' गौर करने वाली बात है कि प्रिया दत्त को अब तक कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। 
 

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