5 राज्यों की हार के बाद अपने विधायकों को संगठन के दायित्व से मुक्त करेगी कांग्रेस

भोपाल
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में कांग्रेस को मिली जबरदस्त हार का असर मध्य प्रदेश कांग्रेस में भी दिखाई देगा। प्रदेश कांग्रेस अब अपने विधायकों को संगठन के कामकाज से मुक्त कर उन्हें क्षेत्र में ही ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश देगी। इस संबंध में सोमवार को कमलनाथ अपनी कोर कमेटी के साथ बैठक कर कोई निर्णय ले सकते हैं।

कांग्रेस के मिशन 2023 की तैयारियों को लेकर पांच राज्यों की हार के बाद नए सिरे से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। खासकर पंजाब में कांग्रेस विधायकों की हुई हार से सबक लेकर मध्य प्रदेश में अपने विधायकों को क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रहने की योजना पर काम करेगी। कांग्रेस के पास अभी 96 विधायक हैं। इनमें से कई विधायकों को प्रदेश कांग्रेस ने संगठन की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप रखी है। इसके चलते ये विधायक अपने क्षेत्र में पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। पंजाब में जिस तरह से कांग्रेस के कई विधायक चुनाव हारे हैं,उससे यह अंदेशा हो गया है कि यदि विधायक अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे तो उन्हें भी बेहतर परिणाम नहीं मिलेंगे। इसे देखते हुए कई विधायकों को संगठन के काम से मुक्त किया जा सकता है। इनकी जगह पर चुनाव नहीं लड़ने वाले संगठन के लोगों को दायित्व दिया जा सकता है। हालांकि कमलनाथ खुद छिंदवाड़ा से विधायक हैं, लेकिन वे पीसीसी चीफ का काम देखते रहेंगे।

इन विधायकों के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
राऊ के विधायक जीतू पटवारी संगठन में मीडिया विभाग के अध्यक्ष हैं। विधायक रवि जोशी घर चाले, घर-घर चलो अभियान के प्रभारी है। बाला बच्चन बाल कांग्रेस के प्रभारी है। इनके अलावा एनपी प्रजापति, सज्जन सिंह वर्मा भी प्रदेश कांग्रेस संगठन में अपना ज्यादा समय दे रहे हैं। इसी तरह कुछ अन्य विधायकों को भी कमलनाथ ने संगठन को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी सौंप रखी है। इन्हें भी अब जिम्मेदारी से मुक्त किया जाएगा।

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