उदयपुर में जुटे कांग्रेस नेता, अरुण-मीनाक्षी की टीम देगी प्रेजेंटेशन

भोपाल
राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस के आज से शुरू हो रहे नव संकल्प चिंतन शिविर में देश भर से कांग्रेस के 422 नेता शामिल हो रहे हैं। इसमें मध्य प्रदेश से गिने चुने  नेताओं को ही इसमें बुलाया गया है। ये सभी नेता आज उदयपुर पहुंच गए हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ भी शामिल हैं। इस शिविर में मध्य प्रदेश के मिशन 2023 को लेकर भी चर्चा होगी।

चिंतन शिविर के लिए कांग्रेस ने कई समितियां बनाई है। इन समितियों में अरुण यादव, मीनाक्षी नटराजन को भी जगह दी गई है। इन दोनों की समितियां इस शिविर में प्रजेंटेशन भी देगी। इसके बाद आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। इस शिविर को मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता बहुत ही महत्वपूर्ण मान रहे हैं। संगठन से लेकर विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में मध्य प्रदेश से कमलनाथ के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश पचौरी, अरुण यादव, मीनाक्षी नटराजन, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और उमंग सिंघार को बुलाया गया है। सभी को एआईसीसी ने सीधे ही शामिल होने की जानकारी भेजी है। अरुण यादव कृषि और कृषकों पर लेकर अपनी समिति को सुझाव दे चुके हैं। उनकी समिति का शनिवार को प्रजेंटेशन होगा।

इसलिए शिविर माना जा रहा महत्वपूर्ण
इस शिविर को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें इस साल और अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर भी चर्चा होगी। शिविर में शामिल होंने के लिए कमलनाथ, सुरेश पचौरी, अरुण यादव और डॉ. गोविंद सिंह एक ही प्लेन से उदयपुर पहुंचे। जहां पर मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में होने वाले चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा होगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के चार प्रमुख कारण पर भी चर्चा होगी।

 इसमें जमीनी निष्क्रियता, गुटबाजी, युवा चेहरो का अभाव और मौके चूकना जैसे कारणों पर भी इस शिविर में चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही यह भी तय हो जाएगा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एकजुट होकर अब चुनाव की तैयारी करना है और प्रदेश सहित स्थानीय नेताओं की जमीनी निष्क्रियता को भी खत्म कर उन्हें सक्रिय किया जाए।

भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस के चिंतन शिविर को लेकर भाजपा ने निशानासाधा है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह चिंतन शिविर नहीं चिंता शिविर है। राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की चिंता, पार्टी को बचाने की चिंता वहां पर होगी।

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