बंगाल में कानून का शासन नहीं, शासक का कानून; उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी ममता पर बरसे जगदीप धनखड़

 नई दिल्ली
 
पश्चिम बंगाल का राज्यपाल रहने के दौरान जगदीप धनखड़ और ममता बनर्जी के बीच कई बार टकराव देखने को मिला था। अब जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बन गए हैं, लेकिन लगता है ममता दीदी से उनकी अदावत अब भी चली आ रही है। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए धनखड़ ने ममता बनर्जी पर तंज कसा है। जगदीप धनखड़ ने आयोग के सालाना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून का शासन नहीं है बल्कि शासक का कानून है।

जगदीप धनखड़ ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से यह पता चलता है कि राज्य में कानून का शासन नहीं है बल्कि शासक का कानून है।' जगदीप धनखड़ करीब तीन सालों तक पश्चिम बंगाल के गवर्नर थे और इस दौरान सीएम ममता बनर्जी से कई मुद्दों पर उनका टकराव हुआ था। यूनिवर्सिटी में वीसी नियुक्त करने से लेकर कानून व्यवस्था तक के मामलों में दोनों के बीच कई बार टकराव देखने को मिला था। इस बीच एनएचआरसी के कार्यक्रम में चेयरपर्सन जस्टिस अरुण मिश्रा ने समान नागरिक संहिता की भी वकालत की।

जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'हमें लैंगिक समानता स्थापित करने की जरूरत है। सभी के लिए समान अधिकार होनी चाहिए। किसी भी धर्म अथवा परंपरा के नाम पर भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। इसलिए यह जरूरी है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में बढ़ा जाए। संविधान का आर्टिकल 44 इसकी वकालत करता है।' यही नहीं उन्होंने कई शहरों में पर्यावरण खराब होने को भी मानवाधिकार का उल्लंघन करारा दिया। उन्होंने कहा कि कई शहरों में हम स्वच्छ हवा तक के लिए तरस रहे हैं, यह भी मानवाधिकार का उल्लंघन ही है। उन्होंने कहा कि पड़ोस के राज्यों में पराली जलाना बंद होना चाहिए क्योंकि दिल्ली का हर बार सर्दियों के मौसम में दम घुटता है।

 

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