ग्रहण बिंदु पर आ रहे हैं मंगल, इन मामलों में अमंगल की है आशंका

मेदिनी ज्योतिष में ग्रहण के समय बनने वाली पक्ष कुंडलियों का विशेष महत्व होता है। लंबी अवधि के सूर्य और चंद्र ग्रहणों का प्रभाव 3 माह तक रहता है। ग्रहण के सबसे अधिक फल तब प्राप्त होते हैं जब कोई ग्रह ग्रहण के अंशों पर गोचर करता है। ग्रहण के समय सूर्य और चन्द्रमा अपनी राशि या राशियों में जिन अंशों पर स्थित होते हैं उन्हें ग्रहण के अंश या ग्रहण बिंदु कहते हैं। इस ग्रहण बिंदु पर जब पाप ग्रह शनि या मंगल गोचर करें तो बेहद बुरी घटनाओं जैसे बाढ़, सूखा, अग्निकांड, युद्ध, भूकंप आदि से जान-माल की बड़ी क्षति होती है और अर्थव्यस्था में भारी उथल-पुथल मचती है। वहीं दूसरी ओर शुभ ग्रहों जैसे गुरु, बुध और शुक्र का ग्रहण के बिंदु पर गोचर जनता को सुख देने वाला होता है।

26 सितम्बर को जब मंगल मकर राशि में श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तो वह 27 /28 जुलाई की मध्य रात्रि को हुए चंद्र ग्रहण के अंशों को प्रभावित करेंगे। 27 /28 जुलाई को हुए चंद्र ग्रहण के समय चन्द्रमा मकर राशि में 11 अंश पर स्थित था, जहां अब पाप ग्रह मंगल का गोचर इस ग्रहण के सबसे बुरे फलों को देने का संकेत दे रहा है। यहां विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि मकर राशि विष्णु पुराण में वर्णित कूर्म चक्र के अनुसार उत्तर भारत और वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को इंगित करता है।

श्रवण नक्षत्र विशेषकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब प्रांत (भारत और पाकिस्तान दोनों का पंजाब सूबा) को प्रभावित कर आने वाले 10 दिनों में यहां किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का संकेत दे रहा है। जल तत्व की राशि मकर में मंगल का ग्रहण और श्रवण नक्षत्र में गोचर आने वाले 10 दिनों में भारत और पाकिस्तान में भारी वर्षा, भूस्खलन और भूकंप से जन-धन की हानि के योग बना रहा है।

इसके अतिरिक्त यदि हम 25 सितंबर की पूर्णिमा की पक्ष कुंडली को देखें तो आने वाले 15 दिन केंद्र सरकार के लिए मुश्किलों भरे लग रहे हैं। 25 सितंबर सुबह 8 बजकर 22 मिनट पर भारतीय समयानुसार पूर्णिमा की कुंडली तुला लग्न की है। जहां लग्न में बन रहा गुरु-शुक्र का योग शत्रु भाव और रंध्र भाव का बुरा सम्बन्ध बना रहा है। राफेल विमान सौदे में नियमों को तोड़ने के आरोप झेल रही बीजेपी की सरकार आने वाले दिनों में और अधिक मुश्किलों में घिरती दिख रही है। पक्ष कुंडली में दशमेश चन्द्रमा के छठे भाव में जाने से विपक्षी दल कांग्रेस राफेल मामले को अगले 15 दिन में सुप्रीम कोर्ट तक ले जा सकती है, इसकी भी प्रबल संभावना दिखती है।

चतुर्थ भाव में बन रही मंगल और केतु की अंशात्मक युति अगले 15 दिनों में आमजनता को बड़ी रेल दुर्घटनाओं, अग्निकांड और प्राकृतिक आपदाओं से कष्ट का संकेत दे रही है। चतुर्थ भाव सार्वजानिक परिवहन का माना जाता है, जहां बैठे मंगल और केतु किसी बड़ी दुर्घटना का योग बना रहे हैं। चतुर्थेश शनि का तीसरे घर में होकर सुप्रीम कोर्ट से संबंधित स्थान नवम भाव को देखना बड़े मुद्दों पर जनहित याचिकाओं के आने का ज्योतिषीय संकेत है। मकर राशि में मंगल और केतु की अंशात्मक युति भाजपा की मिथुन लग्न की कुंडली के अष्टम भाव को पीड़ित करके उनके नेताओं को कष्ट और परेशानी में डाल सकता है। मंगल का मकर में ग्रहण के बिंदु को पीड़ित करना शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट और महंगाई के बढ़ने का योग बना रहा है।

 

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