27 जून को आषाढ़ शिवरात्रि

हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि पड़ती है। इस बार आषाढ़ महीने की मासिक शिवरात्रि सोमवार 27 जून को पड़ने वाली है। सोमवार को शिव जी का दिन माना जाता है जिसकी वजह से इस बार की मासिक शिवरात्रि को बहुत ही खास माना जा रहा है। शिवरात्रि पर भगवान शंकर के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। भक्त विधि विधान से पूजा करते हैं, साथ ही व्रत भी रखते हैं। इस पूजा से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं हैं। आइए जानते हैं कैसे होती है आषाढ़ी मासिक शिवरात्रि में व्रत और पूजा, साथ ही पूजा के शुभ पूजा शुभ के बारे में।

आषाढ़ी मासिक शिवरात्रि 27 जून सोमवार को 3 बजकर 25 से शुरू होकर 28 जून, मंगलवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त
इस पूजा का शुभ मुहूर्त 27 जून रात्रि 12 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 44 मिनट पर खत्म हो जाएगा। यानी पूजा की अवधि पूरे 40 मिनट की है।

पूजा की विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के बाद आप व्रत और पूजा का संकल्प लें। आप घर पर भी पूजा कर सकते हैं। यदि घर में शिवलिंग न हो तो मंदिर जाकर पूजा करें। पूजा के लिए सबसे पहले आप शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद आप चंदन का तिलक लगाएं। भगवान को उनकी पसंद की चीजों का चढ़ावा चढ़ाएं जैसे भांग, धतूर, बेल पत्र आदि। इसके अलावा आप चीनी, शहद आदि भी भगवान को चढ़ा सकते हैं। भगवान शिव के साथ आप माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और नंदी महाराज की भी पूजा करें। इससे आपको इन सभी का आशीर्वाद मिलेगा और आपके जीवन में सुख और समृद्धि आएगी। मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा का पाठ करना करना चाहिए। पूजा खत्म होने पर आप भगवान की आरती करें।

इस पूजा का महत्व है
ऐसा माना जाता है कि यदि कोई कुंवारी लड़की सच्चे मन से शिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा अर्चना करती है तो उसे मनचाहा वर वर मिलता है। इसके अलावा यदि किसी कन्या के विवाह में अड़चनें आती है तो वह भी शिव जी की कृपा से दूर होती है।

 

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