अरपिंदर के खेल के लिए पिता ने गिरवी रख दी थी जमीन, मेडल जीतकर छुड़ाई

नई दिल्ली
एशियाड में गोल्ड मेडल जीत चुके ट्रिपल जंपर अरपिंदर सिंह ने रविवार को चेक रिपब्लिक में चल रहे आईएएएफ कॉन्टिनेंटल कप में 16.59 मीटर की जंप लगाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता है। अरपिंदर की कामयाबी के पीछे की वजह उनकी कड़ी मेहनत के साथ-साथ उनके पिता का त्याग भी है। सेना से रिटायर अरपिंदर के पिता जगवीर सिंह ने बेटे को खिलाड़ी बनाने के लिए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। आज जगवीर को अपने फैसले पर पर गर्व महसूस हो रहा है जगवीर का कहना है कि उनके पास बेटे की सफलता को बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। ट्रिपल जंपर अरपिंदर ने उनकी सारी मेहनत और त्याग को सफल कर दिया।

रिटायर होने के बाद जगवीर की पेंशन केवल 8 हजार रुपये थी। अरपिंदर जब खेलने के लिए बाहर रहते थे तो उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये भेजने पड़ते थे। जगवीर बताते हैं, 'मैं उधार लेकर रुपये भेजता था। 4 लाख रुपये का कर्ज हो गया। दो एकड़ जमीन गिरवी रखनी पड़ी। ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद पंजाब सरकार ने 6 लाख रुपये दिए। इससे मैंने अपनी जमीन छुड़वाई।' जगवीर पुराने दिनों को याद कर कहते हैं, 'अरपिंदर जब 7 साल का था तो पढ़ने में अच्छा नहीं था, लेकिन शरीर से तगड़ा था। मैंने उससे कहा कि कोई भी एक काम चुन ले, खेल या पढ़ाई। मैं उसे सुबह 3 बजे दौड़ाने ले जाता था। मैं साइकल पर होता और वह आगे-आगे दौड़ता था। 3 किमी जाना और इतना ही आना। कभी-कभी यह दूरी चार से 5 किमी भी हो जाती थी।'

जगवीर आगे कहते हैं, 'अरपिंदर सुबह उठने में बड़ी आनाकानी करता था। मुझे उसके मुंह पर पानी फेंकना पड़ता तो कभी गर्दन पकड़कर उठाता। मौसम कोई भी हो, प्रैक्टिस नहीं रोकी। एक बार बारिश में दौड़ते समय वह सड़क पर पड़े बबूल के पेड़ पर गिर गया। चेहरे, गले और पैरों में बहुत चोट आई। तब मैंने उससे कहा था कि बेटे इस चोट से घबराना मत।' वहीं कॉन्टिनेंटल कप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद एनबीटी से बात करते हुए अरपिंदर सिंह ने कहा कि वह इस सफलता से खुश हैं, लेकिन इससे ज्यादा बेहतर कर सकते थे। अरपिंदर कहते हैं, 'इस स्पर्धा का रजत पदक मेरी रेंज में था। रजत विजेता ने 17.02 मीटर की जंप लगाई थी। मैं डेढ़ महीने पहले गुवाहाटी में 17.09 मीटर की जंप लगा चुका था।'

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