काशी के दुर्ग से फिर पूर्वांचल साधने उतरे मोदी

नई दिल्ली     
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 69वां जन्मदिवस अपने संसदीय क्षेत्र काशी के लोगों के बीच मनाया. पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ के मंदिर में दर्शन और पूजा पाठ भी की. चुनावी साल में पीएम का वाराणसी पहुंचना और करोड़ों के विकास परियोजनाओं की सौगात देने के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं.

बता दें कि देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है. इसी फॉर्मूले से बीजेपी 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी से सबसे ज्यादा सीटें हासिल कर सत्ता में विराजमान हुई थी. अब 2019 की जंग फतह करने के लिए फिर मिशन पूर्वांचल पर अपनी निगाहें जमा दी हैं.

पूर्वांचल को साधने के लिहाज से पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को काशी पहुंचे. इस दौरान अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 500 करोड़ के विकास परियोजनाओं के तोहफे से नवाजा. इसमें इलेक्ट्रिकल काम (बिजली ) ओल्ड काशी 36200 लाख, 33 इन टू 11 केवी विद्युत सब स्टेशन बेटावर -279 लाख, अटल इंक्यूबेशन सेंटर 2000 लाख, नागेपुर ग्राम पेयजल योजना -275 लाख, 33 इन टू 11 विद्युत सब स्टेशन कुरुसातो निर्मा -260 लाख का लोकार्पण शामिल है.  

नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से उतरकर विपक्ष का सफाया कर दिया था. उन्होंने यूपी के वाराणसी से बिहार तक के चुनावी नतीजों पर असर डाला था. आजमगढ़ पूर्वांचल की इकलौती सीट थी, जहां बीजेपी नहीं जीत सकी थी. बाकी पूर्वांचल की सभी लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं.

2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने यही रणनीति अपनाई और पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के आखिरी के तीन दिन वाराणसी में रहकर विपक्ष को धराशायी कर दिया था. अब एक बार फिर मोदी ने 2019 फतह करने के लिए काशी को अपना रणक्षेत्र बनाने की कवायद शुरू कर दी है.

गौरतलब है कि मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए यूपी में विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं. पूर्वांचल के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा की एकता से बीजेपी चारों खाने चित हो गई थी. इसके बाद विपक्ष की एकता की ताकत की अजमाइश पश्चिम यूपी के कैराना में भी दिखी, जहां आरएलडी ने बीजेपी को शिकस्त दी.

उपचुनाव में मिले जीत के फॉर्मूले से उत्साहित सपा, बसपा और कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनाकर उतरने का मन बना रहे हैं. तीनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तो बीजेपी को रोकने के लिए हर समझौता करने को तैयार है. आजतक के माइंड रॉक्स प्रोग्राम में उन्होंने कहा था कि 2019 में बीजेपी को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे और सीटों के समझौते के लिए दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम तैयार हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष महागठबंधन बनाकर उतरता है, तो बीजेपी के लिए 2014 जैसे नतीजे दोहराना आसान नहीं होगा. काशी जैसी लोकसभा सीट छोड़ दें तो पूर्वांचल की ज्यादातर सीटें बीजेपी के हाथों से निकल सकती हैं. बीजेपी के हाथों से पूर्वांचल खिसका तो फिर देश की सत्ता तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा.

यूपी के बदले सियासी मिजाज के तहत बीजेपी के लिए पूर्वांचल को साधना काफी अहम हो गया है. शायद यही वजह है कि पीएम मोदी काशी में अपना जन्मदिवस मनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुकाबले पूर्वी उत्तर प्रदेश पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने पूर्वांचल में मिशन-2019 का तानाबाना काशी से बुनने का आगाज कर दिया है. इससे पहले मुलायम के गढ़ आजमगढ़ में उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी परियोजना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की नींव रखी थी. ये देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे गोरखपुर इलाहाबाद और बुंदेलखंड के लिंक एक्सप्रेस वे से भी जुड़ेगा.

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